भाजपा नेता नितिन भूतड़ा ने ‘महायुति धर्म’ निभाते हुए वापस लिया नामांकन
लोकवाहिनी, संवाददाता
यवतमाल। यवतमाल स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव में गुरुवार को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। भाजपा के बागी उम्मीदवार नितिन भूतड़ा, अपक्ष उम्मीदवार सय्यद फारुख तथा साजिद बेग द्वारा नामांकन वापस लिए जाने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है। अब केवल निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक घोषणा बाकी है।
राजनीतिक दृष्टि से प्रतिष्ठित मानी जा रही यवतमाल स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में नामांकन वापसी के अंतिम दिन बड़ी राजनीतिक हलचल दिखाई दी। भारतीय जनता पार्टी के जिला समन्वयक नितिन भूतड़ा ने ‘महायुति धर्म’ का पालन करते हुए चुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके साथ ही शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी के निर्विरोध निर्वाचन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। जिले में भाजपा संगठन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि यवतमाल विधान परिषद की सीट भाजपा को मिले। हालांकि महायुति के सीट बंटवारे में यह सीट शिवसेना (शिंदे गुट) के हिस्से में गई। ऐसे में नितिन भूतड़ा ने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का सम्मान करते हुए अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया। भूतड़ा ने कहा कि महायुति के अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करना उनका कर्तव्य है और गठबंधन धर्म को सर्वोच्च मानते हुए उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।
इससे पहले कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार साहेबराव कोंबले ने भी चुनाव मैदान से हटकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया था। इसके बाद भाजपा के बागी उम्मीदवार नितिन भूतड़ा पर सभी की निगाहें टिकी थीं। गुरुवार को यवतमाल पहुंचने के बाद उन्होंने पूर्व विधायक मदन येरावार से चर्चा कर नामांकन वापस लेने की घोषणा की। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार सय्यद फारुख और साजिद बेग ने भी अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद चुनावी मैदान में केवल दुष्यंत चतुर्वेदी ही शेष रह गए हैं। प्रशासन के अनुसार, चुनाव निर्विरोध होने का प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद चतुर्वेदी को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र सौंपा जाएगा। इस चुनाव में राज्य के मृदा एवं जलसंधारण मंत्री तथा यवतमाल जिले के पालकमंत्री संजय राठौड़ की राजनीतिक रणनीति की व्यापक चर्चा हो रही है।











