एक होने के लिए जो शर्तें हैं, वे दोनों को मंजूर नहीं हैं: संजय शिरसाट
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। राज्य में आने वाले कुछ दिनों में दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के एक साथ आने का दावा किया जा रहा है। यह भी दावा किया गया था कि दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलय को लेकर दिल्ली में बैठक होगी। वहीं विधायक रवि राणा ने दावा किया था कि दोनों राष्ट्रवादी एक होने के बाद सुप्रिया सुले देशभर का कामकाज देखेंगी, जबकि सुनेत्रा पवार राज्य की जिम्मेदारी संभालेंगी। इससे राजनीतिक हलकों में दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलय की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच एक बड़े नेता ने दावा किया है कि दोनों राष्ट्रवादी एक साथ नहीं आएंगे, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
संसद के मानसून सत्र की पृष्ठभूमि में देश और राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार को अलग हुए सांसदों को विलय की मंजूरी दी गई। इससे राज्य के राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। इसी राजनीतिक घटनाक्रम पर मंत्री संजय शिरसाट ने प्रतिक्रिया दी। दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के एक होने की चर्चा पर मंत्री शिरसाट ने कहा, अब कोई भी फैसला नहीं होगा। दोनों राष्ट्रवादी एक साथ नहीं आएंगे। दोनों के एक होने के लिए जो शर्तें हैं, वे दोनों को मंजूर नहीं हैं। अगर वे अलग-अलग किसी में विलय करना चाहें तो हो सकता है, लेकिन आपस में एक-दूसरे में विलय नहीं होगा।
छत्रपति संभाजीनगर के घाटी अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद मंत्री संजय शिरसाट ने कहा, घाटी अस्पताल मराठवाड़ा का प्रमुख केंद्र है, जहां कई जिलों से मरीज आते हैं। उन्हें सुविधाएं देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करती है। पिछले साल मैंने खुद ‘डीपीडीसी’ से लगभग 55 से 60 करोड़ रुपये दिए थे। यहां आने वाला मरीज बेहद गरीब होता है, कई बार उसके पास खाने तक के पैसे नहीं होते। इसलिए हम सभी सुविधाएं देने की कोशिश करते हैं। लेकिन जो शिकायतें मिली हैं, वे गंभीर हैं। मैंने खुद काम की स्थिति देखी। 14 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहा। अभी मैंने इंजीनियरों से कहा है कि जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। बिना किसी देरी के कार्रवाई करें। जो भी कानूनी मामले दर्ज किए जा सकते हैं, दर्ज करें। आने वाली डीपीडीसी बैठक में भी मैं इस मुद्दे को गंभीरता से उठाऊंगा। आने वाली कैबिनेट बैठक में भी मुख्यमंत्री के सामने यह विषय रखूंगा। घाटी अस्पताल के लिए जो योगदान दिया जा रहा है, यदि कोई उसका दुरुपयोग कर रहा है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री से करूंगा।
बागी सांसद शिवसेना के थे और शिवसेना में ही आए
ठाकरे गुट के छह सांसदों के विलय को मंजूरी मिलने पर मंत्री शिरसाट ने कहा, वे शिवसेना के थे और शिवसेना में ही आए हैं। उन्होंने पार्टी नहीं बदली। पार्टी का चुनाव चिह्न वही है, पार्टी की नीति वही है। इसलिए उन पर दल बदल कानून लागू नहीं होगा, इस बात का हमें पूरा विश्वास था। रामरक्षा आंदोलन पर शिरसाट ने कहा, कल उद्धव ठाकरे ने जो किया, उसे जनता ने भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। जब सारा पानी पुल के नीचे से बह गया, तब उन्होंने औपचारिकता निभाने जैसा कार्यक्रम किया। एकनाथ शिंदे ने उन्हें कहा था कि पहले पार्टी की रक्षा करें, कार्यकर्ताओं को संभालें। लेकिन उनसे यह संभव नहीं हुआ, इसलिए उनकी पार्टी की यह स्थिति है।











