छगन भुजबल ने अपनी ही सरकार को घेरा, सीधे सड़क पर उतरने की चेतावनी
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के अनशन का आज सतवां दिन है और उन्होंने सरकार को 11 तारीख तक सभी मांगें मानने का अल्टीमेटम दिया है। कल मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल, मंत्री उदय सामंत और भाजपा विधायक प्रसाद लड के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की; हालांकि ढाई घंटे की चर्चा के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। इन सभी घटनाक्रमों पर अब राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी ही सरकार को निशाने पर लिया है। छगन भुजबल ने कहा कि जाति सत्यापन समिति एक महत्वपूर्ण समिति है। उस पर किसी को भी दबाव नहीं डालना चाहिए। कुछ प्रमाणपत्र जाति सत्यापन समिति ने खारिज किए हैं। उन्हें सुधारकर देते हैं, ऐसा कुछ विधायकों ने कहा है। मेरा उन विधायकों से सवाल है कि मुंबई में 4 नगरसेवकों के जाति सत्यापन में प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए हैं। इसलिए उनका नगरसेवक पद चला गया है। अब क्या उन्हें भी आप सुधारकर देने वाले हैं? ऐसा कहते हुए उन्होंने प्रसाद लाड पर तंज कसा। मराठा समाज की ओर से कुणबी प्रमाणपत्र लेते समय दाखिले पर काट-छांट की गई है। अब क्या आप उन दाखिलों को स्वीकार करेंगे?
जाति सत्यापन समिति पर किसी को भी दबाव नहीं डालना चाहिए। राज्य के महायुति नेताओं को ध्यान रखना चाहिए कि ओबीसी ने आपकी मदद की है। आपकी सरकार बनाने में ओबीसी का महत्वपूर्ण योगदान है, ऐसा कहते हुए छगन भुजबल ने सरकार को घेरा। छगन भुजबल ने आगे कहा कि अब मराठा कुणबी मंत्रालय करना शुरू है? अब यह कैसे होगा? करना है तो हर जाति के लिए करें। हमारा प्रमाणपत्र लेकर कोई विरोध नहीं है। हालांकि, ओबीसी आरक्षण समाप्त नहीं होना चाहिए। सरकार को स्पष्टता लानी चाहिए। कभी ओबीसी आरक्षण ले रहे हैं। कभी एसईबीसी आरक्षण ले रहे हैं, तो कभी ईडब्ल्यूएस आरक्षण ले रहे हैं। हमारे मंत्री आंदोलन करने वालों के पास लगातार जाते हैं लाड़ लड़ाने। हमारे एक नेता गए ही थे लाड़ लड़ाने। एक व्यक्ति मुख्यमंत्री के बारे में में बोले तो तुरंत पुलिस जाकर पकड़ लेती है और यहां तो लगातार निचली भाषा बोली जा रही है, ऐसा कहते हुए मनोज जरांगे पाटिल पर निशाना साधा। अण्णासाहेब आर्थिक विकास महामंडळ को 750 करोड़ और ओबीसी समाज की समिति को केवल 5 करोड़ यह कैसे चलेगा? मैं इसलिए उस दिन समन्वय समिति की बैठक से उठकर बाहर आ गया। यह बिल्कुल नहीं चलेगा। एक तरफ हॉस्टल तैयार हो गया है। एसी हॉस्टल हैं और दूसरी तरफ अभी तक कुछ भी नहीं? यह बिल्कुल नहीं चलेगा। एक तरफ स्थानीय स्तर पर मराठा आरक्षण उपसमिति निर्णय ले रही है। जीआर निकाल रही है। उन्हें यह अधिकार किसने दिया? हमने भी यहां विभिन्न समितियों में काम किया है। अब ओबीसी समिति ने ऐसा किया तो चलेगा क्या? समिति के प्रमुख विखे पाटिल ऐसा करने वाले हैं तो मैं भी सड़क पर उतरे बिना नहीं रहूंगा, ऐसी चेतावनी भी छगन भुजबल ने दी है।
मनोज जरांगे का भुजबल पर तंज
मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर मराठा आरक्षण को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। प्रसार माध्यमों से बात करते हुए ओबीसी नेता छगन भुजबल पर जोरदार हमला बोला है। साथ ही ओबीसी के नाम पर कोई भी राजनीति न करें, ऐसा भी उन्होंने कहा है। अक्ल दाद गिरने के बाद फिर नहीं उगती, वह अब बुढ़ापे में गिरी है। छगन भुजबल सत्ता जहां होती है वहां जाते हैं। अब उन्हें कीमत देने की जरूरत नहीं है। ओबीसी समाज अब समझदार हो गया है, उन्हें भी पता है कि कौन क्या क्या करता है? और अपना कैसे इस्तेमाल करवाते हैं। भुजबल कभी महाविकास आघाडी के होते हैं कभी महायुति के उतरती कला लग गई ना तो ऐसा ही होता है। इस बीच शुक्रवार को मनोज जरांगे के अनशन का सातवां दिन था। मराठा आरक्षण के सवाल पर उन्होंने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। वह एक बार फिर अनशन पर बैठे हैं। पहले पांच दिनों तक उन्होंने पानी भी न पीकर अनशन किया, उसके बाद आखिरकार सरकार की ओर से उन्हें कुछ आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन अभी भी उन्होंने अपना अनशन वापस नहीं लिया है।













