पलटवार : संजय राउत के उस बयान पर अमृता फडणवीस का एक वाक्य में जवाब
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। हमारी मानसिकता राज्य की जनता की सेवा करने की है। देवेंद्र फडणवीस की भी वही मानसिकता है। मेरी भी वही मानसिकता है, ऐसे शब्दों में अमृता फडणवीस ने ठाकरे गुट के नेता संजय राउत को जवाब दिया। देवेंद्र फडणवीस दिल्ली जाने वाले हैं। उन्हें मुंबई से बड़ा बंगला दिल्ली में मिलने वाला है। इसलिए भाभी को धीरे-धीरे मानसिकता तैयार करनी चाहिए। उनकी भावनाओं मैं समझ सकता हूं, ऐसा बयान संजय राउत ने दिया था। इस दौरान उनसे अमृता फडणवीस के देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने को लेकर दिए गए बयान के बारे में पूछा गया।
देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के सेवक हैं और महाराष्ट्र में ही रहेंगे, ऐसा अमृता फडणवीस ने कहा था। उस पर राउत ने तंज कसे हैं। हम कहां कह रहे हैं कि वे महाराष्ट्र के सेवक नहीं हैं? वे महाराष्ट्र के महान सेवक हैं। अलग विदर्भ नहीं बनता, तब तक मैं शादी नहीं करूंगा, ऐसा इन महान सेवक ने कहा था। क्या हुआ? मैं भाभी साहिबा की भावनाओं को समझ सकता हूं। भाजपा और संघ के लिए राष्ट्र प्रथम है ना? फिर उन्हें जाना पड़ेगा।
यशोवंतराव चव्हाण भी देश के लिए दौड़कर गए थे। यहां के बंगले से दिल्ली के बंगले में जाना पड़ेगा। बड़ा बंगला मिलेगा। इसलिए भाभी साहिबा को धीरे-धीरे मानसिकता तैयार करनी चाहिए, ऐसा तंज संजय राउत ने कसा। उस पर बोलते हुए अमृता फडणवीस ने यह बयान दिया है। अमृता फडणवीस ने मीडिया से संवाद करते हुए राउत को एक वाक्य में जवाब दिया है।
हमारी मानसिकता, देवेंद्र फडणवीस की मानसिकता महाराष्ट्र की सेवा करने की है। और वही रहने वाली है। हमारी जो मानसिकता है, वह महाराष्ट्र के लिए उचित है, ऐसा अमृता फडणवीस ने कहा है। विरोधियों द्वारा की जाने वाली आलोचना का भी उन्होंने जवाब दिया।
रोज सुबह उठकर भोंगा शुरू करना उचित नहीं
आलोचना करना विरोधियों का काम ही होता है। हालांकि, वह आलोचना कंस्ट्रक्टिव होनी चाहिए। रोज सुबह उठकर भोंगा शुरू करना उचित नहीं है। कोई मुद्दा हो तो उस पर आलोचना करना निश्चित रूप से लोकतंत्र में आवश्यक है। हालांकि बेवजह आलोचना नहीं होनी चाहिए, ऐसा तंज अमृता फडणवीस ने कसा।
ऐसा नहीं होना चाहिए था
राज्य के आश्रम स्कूलों की स्थिति पर भी उन्होंने टिप्पणी की। आश्रम स्कूलों में जो हुआ है, उसके बारे में मैंने देखा और पढ़ा है। ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने उस संबंध में कार्रवाई भी की है। ऐसी चीजों के बारे में निश्चित रूप से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही ऐसी चीजों को रोकने के लिए भी कुछ निवारक कार्रवाई होनी चाहिए, ऐसा मत उन्होंने व्यक्त किया।
मटर्निटी लिव कितनी उचित?
तमिलनाडु में तीसरे बच्चे के लिए मटर्निटी लिव की घोषणा की गई है। उस पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। बच्चों के पालन-पोषण के लिए समय मिलना महिलाओं का अधिकार है। महिलाओं को छुट्टी मिलनी ही चाहिए। हालांकि हमारी जनसंख्या पहले ही इतनी बढ़ गई है। इसलिए तीसरे बच्चे के लिए ऐसी मटर्निटी लिव देना कितना उचित है? इस पर भी विचार होना आवश्यक है, ऐसा भी उन्होंने कहा।
जुन्नर घटना पर प्रतिक्रिया
जुन्नर में बालिका के साथ हुए अत्याचार पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। हमने (लड़कियों की सुरक्षा के लिए) एक कानून भी बनाया है। इसलिए इन घटनाओं के बाद कार्रवाई होती ही है। फिर भी कुछ घटनाएं हो रही हैं। समाज के रूप में हम कहां कम पड़ रहे हैं, यह भी देखना जरूरी है। जो भी आरोपी ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, उनके मूल्य और संस्कार कैसे हैं, यह भी देखना जरूरी है।












