लोकवाहिनी संवाददाता चंद्रपुर। माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी (अल्ट्राटेक) की लाइमस्टोन खदान से प्रभावित कसबी क्षेत्र के आदिवासी पांच किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वर्षों से न्याय न मिलने से आक्रोशित पांच किसानों ने सोमवार दोपहर राजुरा उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया।
घटना की जानकारी मिलते ही राजुरा पुलिस मौके पर पहुंची और सभी किसानों को तुरंत उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने के कारण बाद में उन्हें चंद्रपुर जिला अस्पताल में रेफर किया गया है। जहर सेवन करने वाले किसानों में लच्छू चिन्नू मडावी (55, बाबुझरी), जयराम गंगू मडावी (45, नोकरी), जंगू सोमा पेंदोर (48, कसबी), बालाजी विश्राम (52, नोकरी) और मारोती कनु तलांडे (55, कसबी) शामिल हैं।
15 वर्षों से जारी है संघर्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार, माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी की खदान परियोजना के कारण कसबी क्षेत्र के कोलाम और अन्य आदिवासी किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले उचित मुआवजा दिलाने के लिए किसान पिछले 15 वर्षों से प्रशासन और कंपनी के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि कई बार निवेदन और आंदोलन करने के बावजूद न तो कंपनी ने ध्यान दिया और न ही सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की। करीब 10 महीने पहले उपविभागीय अधिकारी द्वारा संबंधित जमीनों (सर्वे नंबर 44, 45, 46, 47) का माप करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक मापन नहीं किया गया है। मापन के बिना मुआवजा या जमीन का अधिकार मिलना संभव नहीं है।
लंबे समय से न्याय न मिलने और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसानों ने यह आत्मघाती कदम उठाया। इस घटना के बाद प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं किसानों की स्थिति पर पूरे जिले की नजर बनी हुई है।










