नाना पटोले और सांसद प्रशांत पडोले के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
लोकवाहिनी, संवाददाता:भंडारा। भंडारा-गोंदिया जिले के किसानों, गोसीखुर्द परियोजना प्रभावितों और बेरोजगार युवाओं की लंबित मांगों को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को भंडारा के कारधा क्षेत्र में वैनगंगा नदी में उतरकर जोरदार ‘जलसमाधि आंदोलन’ किया। यह आंदोलन नाना पटोले और डॉ. प्रशांत पडोले के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसने पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सुबह से ही आंदोलन स्थल पर हजारों किसान, परियोजना प्रभावित और कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हो गए थे। हाथों में तख्तियां और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए आंदोलनकारी वैनगंगा नदी के पात्र में उतर गए। ‘किसानों को न्याय दो’, ‘गोसेखुर्द प्रभावितों को अधिकार दो’ और ‘सरकार जागो’ जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर किसानों और परियोजना प्रभावितों की समस्याओं की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि वर्षों से आंदोलन, ज्ञापन और बैठकों के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जिसके कारण मजबूर होकर जलसमाधि आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले गोसेखुर्द परियोजना प्रभावितों के मुद्दे पर मंत्री गिरीश महाजन ने चर्चा और बैठक का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने वैनगंगा नदी में उतरकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया था। नदी क्षेत्र में बैरिकेड्स लगाए गए थे और सुरक्षा के लिए नावों की भी व्यवस्था की गई थी। हालांकि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और परियोजना प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष जारी रखेगी। भंडारा-गोंदिया जिले में उठे इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और अब पूरे विदर्भ की नजर सरकार की अगली भूमिका पर टिकी हुई है।











