मुंबई। टीसीएस यानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज नासिक कांड पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहली प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा है कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में नासिक से 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएम फडणवीस ने इस मामले को बेहद चिंताजनक करार दिया है। साथ ही कहा है कि कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इसकी जड़ तक जाने के लिए जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “हम इसमें शामिल किसी को नहीं बख्शेंगे। किसी को भी सुरक्षा नहीं मिलेगी। हमने केंद्रीय एजेंसियों से इस मामले की बारीकी से जांच करने के लिए कहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि ये गतिविधियां एक सुनियोजित मॉडल के तहत की जा रही थीं। उन्होंने टीसीएस प्रबंधन की सराहना की कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और आरोपियों का बचाव नहीं कर रहे हैं। फडणवीस ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी सूचित कर दिया गया है।
पुलिस ने दो आरोपियों को अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें 18 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अदालत में पेश किए गए आरोपियों की पहचान रजा रफीक मेमन (35) और शफी जुबखान शेख (36) के रूप में हुई है। इन्हें संबंधित मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बुधवार को फिर से गिरफ्तार किया गया।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने दो महिला आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करते हुए बुधवार को कहा कि गिरफ्तार की गई यूनिट की ऑपरेशन और एचआर प्रमुख ने कथित तौर पर एक पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने से हतोत्साहित किया था। उन्होंने बताया कि एचआर प्रमुख ने महिला से कहा था कि “ऐसी चीजें होती रहती हैं,” जिसने आरोपियों का साथ दिया था। दोनों महिला आरोपियों में से एक फरार है। उन्होंने कहा था कि जांच में पता चला है कि सात पुरुष आरोपी एक संगठित गिरोह की तरह महिला कर्मचारियों को निशाना बना रहे थे।
महिला कर्मचारियों के गंभीर आरोप
पुलिस की एसआईटी (SIT) ने बताया कि आठ महिला कर्मचारियों ने वरिष्ठ सहयोगियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कंपनी के एचआर विभाग से शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। यह पूरा विवाद फरवरी 2022 से मार्च 2024 के बीच का बताया जा रहा है।
एक आरोपी पर आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर एक महिला कर्मचारी के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके अलावा, महिला कर्मियों के साथ छेड़छाड़ और उनके निजी जीवन पर भद्दे कमेंट्स करने के भी आरोप हैं। जब शिकायत कंपनी के बड़े अधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों का साथ दिया।
पुलिस ने अपने बयान में बताया कि आरोपियों पर सिर्फ महिलाओं के उत्पीड़न का ही मामला नहीं है; उन्होंने एक पुरुष कर्मचारी को जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, उस कर्मचारी के धर्म का अपमान भी किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।










