मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राहुल गांधी का एकमात्र एजेंडा अराजकता फैलाना है। बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में भाषण दिया। इस भाषण पर काफी हंगामा हुआ। अपने भाषण में उन्होंने छात्रों से बातचीत का उल्लेख किया। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने उनसे कहा कि भारत में तीन प्रकार के लोग हैं। एक विद्यार्थी, दूसरे मूर्ख और तीसरे अंधभक्त। विद्यार्थी सब कुछ सीखने के लिए तैयार रहते हैं। इस श्रेणी में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक सभी आते हैं। मूर्ख लोग सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है और खुद को भगवान समझते हैं। जबकि अंधभक्त मूर्खों से भी आगे निकल चुके होते हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सीजीपी आंदोलन के छात्रों पर पैलेट गन चलाने और उनका खून बहाने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। इसके बाद संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामा हुआ। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इस पूरे मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का एकमात्र एजेंडा अराजकता फैलाना है। मैंने राहुल गांधी का भाषण नहीं सुना। मेरे पास इतना समय नहीं है, क्योंकि उनके भाषण में कुछ नहीं होता। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि विपक्ष के नेता को आरोप लगाने चाहिए, अगर कोई गलत बात है तो उस पर टिप्पणी करनी चाहिए। लेकिन आपने देश के युवाओं के लिए क्या किया? उनके हित में क्या सकारात्मक बात कही? उनके कल्याण के लिए क्या कहा? पूरे दिन झूठे आरोप लगाने और कुछ भी बोलने से युवाओं का कोई भला नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं के बारे में सोचा है। इसलिए एक मजबूत विधेयक आने वाला है। यह विधेयक पारित होने के बाद सुरक्षित परीक्षा प्रणाली आएगी और युवाओं का कल्याण होगा। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर भी टिप्पणी की। इस पर पूछे जाने पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा, राहुल गांधी कुछ भी बोल सकते हैं। राहुल गांधी क्या हैं, यह भारत जानता है। मोदी सरकार क्या है और प्रह्लाद जोशी कौन हैं, यह भी जनता जानती है। राहुल गांधी का एजेंडा सिर्फ अराजकता फैलाना है और वे उसी पर काम कर रहे हैं।
केस वापस लेने के आदेश
इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए केस वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े सभी केस वापस लेने के निर्देश गृह विभाग और पुलिस विभाग को दिए गए हैं। राज्य में सबसे अधिक धारा 144 और भीड़ नियंत्रण से जुड़े मामले हैं, लेकिन जो भी केस हैं उन्हें वापस लेने का आदेश दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र पुलिस ने बहुत संयम का परिचय दिया था।
जरांगे पाटिल के आंदोलन पर निकाला जा सकता समाधान
इस दौरान उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र मांगने पर मिलता है। जिसने भी मांगा है उसे मिला है। मेरी जानकारी के अनुसार लंबित मामलों की संख्या कम है। ऐसा नहीं है कि कोई मांग रहा है और उसे नहीं मिल रहा। हमारी सरकार ने मराठा समाज के लिए जितने निर्णय लिए और लागू किए, उतनी किसी सरकार ने नहीं किए। यदि किसी को नाराजगी है और लगता है कि उचित नहीं हुआ है, तो उसका समाधान निकाला जा सकता है।













