पुणे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शुक्रवार को पुणे आए थे। उस समय मीडिया ने उनसे विद्यानंद बापट के साथ हुई मारपीट के बारे में पूछा। सबसे पहले यानी हुई घटना की मैंने निंदा की है। हर किसी का अपना दृष्टिकोण होता है। अलग-अलग विचार हो सकते हैं। कुछ इस तरफ के, कुछ उस तरफ के लोग हो सकते हैं। लेकिन हिंसा उचित नहीं है। हर किसी को अपना मुद्दा रखना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि, कोई त्योहार और उत्सव हम मनाते हैं, उस समय उसे अधिक से अधिक पारंपरिक तरीके से मनाया जा सके तो उसका महत्व अधिक होता है। लेकिन सालों-साल त्योहार मनाते समय कुछ तरीके चलन में आ जाते हैं। लेकिन उन तरीकों को बंद करते समय केवल कानून के डंडे से बंद न करके लोगों को विश्वास में लेकर उस पर रास्ता निकालना अधिक जरूरी है, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा।
कानून तो इस्तेमाल करना पड़ता है उसके बिना बंद नहीं होता है। लेकिन उसके साथ लोगों को विश्वास में लेकर उसमें से रास्ता निकालना जरूरी होता है। आज मेरी पुणे सीपी से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि काफी चीजों पर सभी की सहमति हो गई है। खासकर जिन चीजों से लोगों को परेशानी होती है। डीजे में भूकंप आने जैसा शोर होता है ऐसी सभी चीजों पर लगभग सभी की सहमति हो रही है। मुझे लगता है पुणे में गणेशोत्सव हो, अन्य सभी उत्सव हों, अच्छे पारंपरिक तरीके से मनाए जाते हुए दिखाई देंगे। लोगों की भागीदारी से ही यह डीजे का दिखावा कम होते हुए, खत्म होते हुए दिखाई देगा, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा। डीजे के लिए कोई नीति तैयार करेंगे क्या? इस पर भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया। पॉलिसी एकदम से तैयार नहीं होती। अनुभव ऐसा है कि, हर जगह चर्चा से 90 से 95 प्रतिशत लोग तैयार हो जाते हैं। फिर आदेश निकाला जा सकता है।













