गढ़चिरोली। जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति के बीच प्रशासन और पुलिस की तत्परता से एक 35 वर्षीय युवक की जान बचा ली गई। सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाने के कारण गंभीर रूप से बीमार युवक को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
लगातार बारिश के चलते इंद्रावती, पामुलगौतम और पर्लकोटा नदियां उफान पर हैं, जिससे भामरागढ तहसील के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। इसी बीच लाहेरी निवासी शामसुंदर नरोटी (35) की विषाक्त पदार्थ के सेवन के कारण अचानक तबीयत गंभीर हो गई। सड़क मार्ग बंद होने के कारण उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाना संभव नहीं था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गढ़चिरोली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। इसके बाद पुलिस सेवा में उपलब्ध पवन हंस के हेलीकॉप्टर को तुरंत भामरागढ के लिए रवाना किया गया। हेलीकॉप्टर की मदद से शामसुंदर नरोटी को दुर्गम क्षेत्र से सुरक्षित एयरलिफ्ट कर गढ़चिरोली लाया गया और जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। समय पर उपचार मिलने से उनकी हालत में सुधार हुआ और वे खतरे से बाहर हैं। इस घटना के बाद पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने नागरिकों से अपील की कि आपातकालीन स्थिति में अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल या आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सा मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
यह पूरा राहत एवं चिकित्सकीय एयरलिफ्ट अभियान गढ़चिरोली पुलिस, जिला प्रशासन, भामरागढ उपविभागीय पुलिस अधिकारी कार्यालय, भामरागढ पुलिस थाना, राजस्व
विभाग तथा पवन हंस के पायलट अरविंद सैनी और राजीव शर्मा के समन्वय से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। बाढ़ से घिरे दुर्गम क्षेत्रों में यह अभियान प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और आपदा प्रबंधन की प्रभावी तैयारियों का उदाहरण बनकर सामने आया।
गोगांव में रेलवे की लापरवाही से जलमग्न हुई धान की फसल : किसानों का आरोप
गढ़चिरोली। गोगांव क्षेत्र के निचले इलाकों में वर्षा जल की निकासी के लिए पुल निर्माण की किसानों की वर्षों पुरानी मांग की अनदेखी अब भारी पड़ती नजर आ रही है। रेलवे प्रशासन की लापरवाही के कारण बारिश का पानी खेतों में भर गया है, जिससे करीब आठ एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न हो गई है। कई दिनों से पानी नहीं उतरने के कारण खड़ी फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है और किसानों के सामने खरीफ सीजन की पूरी मेहनत बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है। किसानों का कहना है कि गोगांव के समीप रेलवे लाइन निर्माण के दौरान ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आगाह किया था कि बरसात के मौसम में इस क्षेत्र में पानी जमा होगा। उन्होंने प्राकृतिक जल निकासी बनाए रखने और खेती को सुरक्षित रखने के लिए यहां पुल बनाने की मांग कई बार उठाई थी। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने इस मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई।
लगातार हो रही बारिश के चलते अब स्थिति गंभीर हो गई है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा हुआ है, जिससे धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं हुई तो फसल के सड़ने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस घटना में किसान कालुराम मानकर, कालिदास चापले, आनंराव चापले, मारोती चापले, अनिल चापले, अनिल मिंगर और नयन फुलझले की धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल पंचनामा कर उचित मुआवजा देने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए संबंधित स्थान पर पुल का निर्माण कराने की मांग की है।













