नागपुर। महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण नागपुर ने जलसंसाधन विभाग में कार्यकारी अभियंता पद की पदोन्नतियों से संबंधित दाखिल तीन याचिकाओं 461/2020, 573/2025 और 1164/2025 पर संयुक्त निर्णय 26 अप्रैल 2026 को दिया। कार्यकारी अभियंता पद पर पदोन्नति और सेवा वरिष्ठता के संबंध में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय और मैट के विभिन्न आदेशों तथा 1983 के अधिसूचित नियमों की स्पष्ट व पूर्ण व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यकारी अभियंता पद की नियमित पदोन्नतियां एवं अवशिष्ट (अभावित) पदोन्नतियां नियमित करने के संदर्भ में आदेश के परिच्छेद 27 में विस्तृत कार्यप्रणाली बताई गई है। इसके अनुसार कार्यकारी अभियंता वर्ग में पदोन्नतियां 1983 के नियमों की व्यवस्था के अनुरूप कुल वार्षिक रिक्त पदों पर निर्धारित कोटा लगाकर की जाएंगी।
कार्यकारी अभियंता पद पर प्रत्येक वर्ष की शुरुआत में जो रिक्त पद हों और चयन सूची के तहत वर्ष में सुपरिटेंडिंग अभियंता के पदों पर पदोन्नति, सेवानिवृत्ति आदि कारणों से रिक्त होने वाले पद – इन सबको मिलाकर कुल रिक्त पदों की गणना करनी होगी। इन कुल रिक्त पदों का आवंटन 1983 के नियमों के अनुसार इस प्रकार किया जाएगा : सहायक कार्यकारी अभियंताओं को 40%, सहायक अभियंता श्रेणी-1 को 25%, उपविभागीय अभियंता को 25% और उपविभागीय अधिकारियों को 10%- इन अनुपातों के आधार पर नियमित पदोन्नतियां की जाएंगी। इसमें सबसे पहले पहले से दिए गए अवशिष्ट पदोन्नतियां नियमित की जाएंगी। इन समायोजनों को लागू करके अवशिष्ट सेवा में जो अधिकारी नियमित नहीं हैं, उन्हें अस्थायी रूप से तब तक नियुक्त रखा जाएगा जब तक कि उसी संवर्ग के नियमित पदों के अधिकारियों की उपलब्धता न हो। आदेश ऐसा है कि जब नियमित कार्यकारी अभियंता और अवशिष्ट कार्यकारी अभियंता की संयुक्त संख्या कार्यकारी अभियंताओं के संवर्ग पद संख्या से अधिक होगी, तब अवशिष्ट सेवा में नियुक्त अधिकारियों के पदोन्नति आदेश रद्द किए जाएंगे। इसमें कहा गया है कि सूची में अंतिम आने वाले अधिकारी को पहले पदोन्नत किया जाएगा।
मैट संभाजीनगर ने इसी तरह के मामले में 18 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार 1970 के असंवैधानिक और अधिक्रमित नियम 27 के इस्तेमाल से संवर्ग संख्या पर कोटा लगाने को तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं।
जलसंसाधन विभाग ने मैट नागपुर के 24 अप्रैल 2026 के आदेशानुसार 1983 के नियमों के अनुसार गणना किए बिना सहायक कार्यकारी अभियंता वर्ग के छह अधिकारियों को कार्यकारी अभियंता पद पर पदोन्नति के आदेश 3 जून 2026 को जारी किए। इससे पहले जलसंसाधन विभाग ने 1970 से 1995 के अवधि के पुनरावलोकन की कार्रवाई 1983 के नियमों के अनुसार 2005 और 2010 में की थी और इसे 2007 व 2013 में अंतिम रूप दिया गया था। पदोन्नति के 1983 के नियमों के अनुसार पुनरावलोकन की कार्रवाई 1995 से लंबित रखी गई है। जब तक वर्तमान में नियमित और रिक्त पर कार्यरत कार्यकारी अभियंत्रियों की गणना नहीं की जाती, तब तक पदोन्नति की प्रक्रिया करना न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी।














