समय पर बारिश नहीं होने से खेती पर संकट
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। विदर्भ में मृग नक्षत्र बीतने के बावजूद मानसून की राह तकते किसान थक चुके हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सूखे की आशंका बढ़ रही है। अल नीनो का प्रभाव बारिश में देरी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। जलाशय सूख रहे हैं और कई इलाकों में जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। जून का आधा महीना बीत चुका है, फिर भी विदर्भ में मानसून का कोई अता-पता नहीं है। मृग नक्षत्र में आमतौर पर अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस बार बारिश की अनुपस्थिति ने किसान और आम जनता दोनों को चिंता में डाल दिया है। इस भयंकर गर्मी में किसान चिंतित हो चुका हैं। मानसून की बारिश नहीं होने से किसान मायूस हैं। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष औसत से कम बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे बुआई के मुहाने पर खड़े किसानों के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है।
वर्तमान में जिलेभर में मानसून पूर्व की बारिश के बजाय तेज धूप और भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून इस बार पहले मुंबई में प्रवेश नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्नाटक से होकर मराठवाड़ा और विदर्भ की ओर बढ़ेगा। अल नीनो के कारण इस साल बारिश की कमी का अनुमान भी व्यक्त किया गया है। इसलिए, किसान अब आर्द्रा नक्षत्र पर निर्भर हैं। जून के पहले से सभी किसान बुआई के लिए तैयार होते हैं, लेकिन इस साल बारिश न होने से ज्यादातर किसान बुआई के लिए तैयार नहीं हैं। पिछले 50 वर्षों में यह सबसे गर्म गर्मी का मौसम माना जा रहा है। गर्मी के प्रकोप से खेत सूख रहे हैं। धान, सोयाबीन, कपास और दालों की खेती के लिए अगले दो हफ्ते बेहद क्रिटिकल होने वाले हैं। अगर जून के अंत तक बंगाल की खाड़ी में कोई नया सिस्टम बनता है और मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो किसानों का नुकसान टाला जा सकता है। अगर जुलाई में यह ड्राई स्पेल खिंचा तो जलाशयों के जल स्तर और देश की कृषि पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
अगले चार दिनों तक लू की संभावना
विदर्भ में मानसून का इंतजार और लंबा होने वाला है क्योंकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 25 जून से पहले इस क्षेत्र में मौसमी बारिश शुरू होने की संभावना नहीं है। इस बीच, निवासियों को भीषण गर्मी के एक और दौर का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि अगले चार दिनों तक लू चलने की आशंका है। विदर्भ में मानसून अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है। इस क्षेत्र में गरज के साथ बारिश जारी है और लू चलने की चेतावनी दी गई है। बिजली गिरने के साथ बारिश और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। नागपुर क्षेत्र में गरज के साथ बारिश होगी, जबकि अकोला और अमरावती समेत कुछ जिलों में लू चलेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्व अधिकारी माणिकराव खुले ने कहा कि अनुकूल मौसम प्रणाली के अभाव के कारण कोंकण क्षेत्र में मानसून रुका हुआ है। परिणामस्वरूप, महाराष्ट्र के आंतरिक भागों में मानसून की प्रगति में देरी हुई है।
किसान जल्दबाजी न करें
जून में केवल सामान्य से महज 26 प्रतिशत बारिश हुई है, जिसके बाद सरकार ने किसानों को बुआई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी। एक जून से 15 जून के बीच राज्य में सामान्य 103.8 मिलीमीटर के मुकाबले 27.4 मिमी बारिश हुई। मानसून की धीमी चाल और भीषण गर्मी के कारण खरीफ की बुआई में भारी संकट आ गया है। राज्य में अब तक सामान्य से लगभग 74 फीसद कम बारिश हुई है, जिसके कारण कृषि विभाग ने किसानों को खेत तैयार होने के बावजूद बिना पर्याप्त नमी के जल्दबाजी में बीज न बोने की सलाह दी है। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने किसानों से आग्रह किया है कि जब तक खेत में कम से कम 75 से 100 मिमी बारिश न हो जाए, तब तक बुआई से बचें।










