नशामुक्ति के लिए ‘नशामुक्ति मुंबई’ अभियान का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया शुभारंभ
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की ओर से नशामुक्ति के लिए ‘नशामुक्ति मुंबई’ अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों वरली में किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम डोम, वरली में हजारों स्कूली बच्चों को देवेंद्र फडणवीस ने ड्रग्स-फ्री समाज की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशामुक्ति भारत का संकल्प लिया है। इसके लिए हमें भी मुंबई और महाराष्ट्र को ड्रग्स-फ्री बनाना आवश्यक है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं, अंतरिक्ष क्षेत्र में हमने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिका के बाद हमने यह उपलब्धि हासिल की है। चाहे एआई हो या विभिन्न प्रकार की तकनीक, भारत इन सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है।
इसी के साथ रक्षा क्षेत्र में भारत ने जो प्रगति की है, वह भी चौंकाने वाली है। ऑपरेशन सिंधु के दौरान भी हमने दिखा दिया कि यह पुराना भारत नहीं, नया भारत है। अब सबको पता है कि भारत पाकिस्तान में घुसकर भी मार सकता है। यह युवाओं का भारत है। दुनिया में सबसे अधिक युवा हमारे भारत में हैं, देवेंद्र फडणवीस ने कहा। अगर यह युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ती, तो भारत दुनिया का महागुरु बन सकता है। यह बात दुश्मन को भी पता है। भारत को हराया नहीं जा सकता, उसकी ताकत लगातार बढ़ रही है। इसलिए एक नई रणनीति शुरू की गई है- भारत को भीतर से खोखला करने की। जिस युवा शक्ति के माध्यम से भारत आगे बढ़ने वाला है, उसी युवा पीढ़ी को नशे का आदी बना दिया जाए और उसकी दिशा भटका दी जाए, तो देश खोखला हो जाएगा। ऐसा एक छिपा हुआ युद्ध शुरू किया गया है। यह दावा देवेंद्र फडणवीस ने किया। इस युद्ध का सबसे बड़ा हथियार ड्रग्स है। युवा शक्ति को नशे का गुलाम बनाकर भविष्य को बर्बाद करने की साजिश चल रही है। यह कोई साधारण लड़ाई नहीं है और न ही केवल घर-परिवार की लड़ाई है। दुर्भाग्य से इस साजिश में हमारे देश की कुछ ताकतें भी पैसे कमाने के लिए शामिल हो गई हैं। इसलिए हमें भी उनके खिलाफ सामूहिक युद्ध छेड़ना होगा। इसमें कई विभागों की भूमिका है, लेकिन विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों-सभी को मिलकर काम करना होगा, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा। एक तरफ ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए पुलिस काम करेगी, लेकिन अगर हम विद्यार्थियों यह तय कर लें कि ‘नो ड्रग्स’, तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वह इसकी बिक्री या वितरण करे। हर स्तर पर रोक लगाकर जहाँ-जहाँ ड्रग्स तैयार किए जाते हैं, वहाँ कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास ड्रग्स बेचने वालों को ढूंढकर जेल में डालना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर ऐसा किया गया, तो अगले दो से तीन वर्षों में हम महाराष्ट्र को ड्रग्स-फ्री बनाने में सफल होंगे।












