लोकवाहिनी, संवाददाता:हनोई। वियतनाम की राजधानी हनोई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा बलों की वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण भारत किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में नहीं आएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया है कि भारत की परमाणु नीति स्पष्ट है। भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है, लेकिन न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) की नीति रही है, लेकिन भविष्य की परिस्थितियाँ क्या होंगी, यह समय पर निर्भर करेगा।
हनोई में भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को लेकर चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ा है। भारत और वियतनाम के बीच रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि 13 दिसंबर, 2023 से भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को लेकर जो कड़े कदम उठाए गए, उनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
शाह ने कहा कि 24 अगस्त, 2024 को सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजी) की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश दिए गए थे। राजनाथ सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि 31 मार्च 2026 तक देश की सुरक्षा सीमाओं को और अधिक सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन ने दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है। 19 मई 2026 की तिथि महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अब वैश्विक मंच पर एक मजबूत रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। भारत और वियतनाम के बीच यह समझौता आने वाले समय में रक्षा तकनीक और प्रशिक्षण में एक मील का पत्थर साबित होगा।











