कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षरों से तैयार किए गए मंजूरी आदेश
लोकवाहिनी संवाददाता
गढ़चिरोली। कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर और लेटरहेड का दुरुपयोग कर जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग और जिला परिषद के लिए दो-दो करोड़ रुपये, कुल चार करोड़ रुपये के निधि वितरण संबंधी फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति आदेश तैयार किए जाने का सनसनीखेज मामला 2 जून 2026 को सामने आया है। इस प्रकरण में गढ़चिरोली पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस के अनुसार जिले में खनिजों के उत्खनन से प्राप्त रॉयल्टी और जिला खनिज निधि (डीएमएफ) का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों के लिए किया जाता है।
इन कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति और निधि वितरण के आदेश कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी किए जाते हैं। 22 जून 2026 को खनन विभाग के ऑपरेटर राहुल रेवाडे के मोबाइल पर प्रशासनिक स्वीकृति आदेशों की दो पीडीएफ फाइलें प्राप्त हुईं। 7 अप्रैल 2026 की तारीख वाले इन आदेशों में उल्लेखित कार्यों को मंजूरी मिली है या नहीं, इसकी जानकारी मांगी गई थी। रेवाडे ने तत्काल यह मामला सहायक जिला खनिज अधिकारी राहुल राठौड़ के संज्ञान में लाया। राठौड़ ने 23 जून को दस्तावेजों की जांच की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आदेश फर्जी हैं और उन पर कलेक्टर के नकली हस्ताक्षर किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अविशांत पांडा ने तत्काल पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि 15 से 22 जून 2026 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने शासकीय अभिलेखों का दुरुपयोग कर ठेकेदारों को आर्थिक रूप से ठगने अथवा सरकारी निधि हड़पने के उद्देश्य से इन फर्जी आदेशों का प्रसार किया।
मुख्य सूत्रधार की तलाश जारी
हायक जिला खनिज अधिकारी राहुल राठौड़ की लिखित शिकायत पर गढ़चिरोली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 336(3), 337, 338, 318(4), 62 और 340 के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस निरीक्षक विनोद चव्हाण ने बताया कि इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी प्रशासनिक मंजूरी आदेश किसने तैयार किए और इसके पीछे कोई राजनीतिक या संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इतनी बड़ी जालसाजी बिना अंदरूनी जानकारी या किसी प्रभावशाली समर्थन के संभव नहीं है। इसलिए खनन विभाग अथवा राजस्व विभाग से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस घटना ने प्रशासनिक दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था और डीएमएफ निधि वितरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे छिपे असली चेहरे कब सामने आते हैं।











