किसानों को राहत देने आगे आया प्रशासन
लोकवाहिनी संवाददाता
वर्धा। वर्ष 1938 से संचालित और महात्मा गांधी की प्रेरणा से स्थापित प्रसिद्ध गोरस भंडार संस्था पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुक्त तुकाराम मुंडे के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के तहत संस्था के दूध, दही, घी, खोवा, गोरस पाक समेत अन्य उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने तथा संस्था का कामकाज तत्काल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक हल्कों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। गोरस भंडार से जुड़े सैकड़ों दुग्ध उत्पादक किसानों में चिंता का माहौल है। संस्था के बंद होने से किसानों के सामने दूध की बिक्री और उचित मूल्य प्राप्त करने का संकट खड़ा हो गया। किसानों ने इस मुद्दे को लेकर पालकमंत्री डॉ. पंकज राजेश भोयर का घेराव कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए पालकमंत्री डॉ. भोयर ने सीधे एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे से संपर्क किया और किसानों के हितों की रक्षा को लेकर चर्चा की। इस संबंध में डॉ. भोयर ने कहा कि सरकार किसानों को किसी भी हालत में असहाय नहीं छोड़ेगी और उनके दूध की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मदर डेयरी के सहयोग से किसानों की समस्या का अस्थायी समाधान निकाल लिया गया है। मदर डेयरी के अधिकारियों के साथ समन्वय कर दूध संग्रहण की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी गई है। भाजपा नेता सुधीर दिवे ने बताया कि किसानों को संकट में देखते हुए मदर डेयरी के सेवाग्राम और दहेगांव स्थित संग्रहण केंद्रों तथा पिंपलखुटा के फिलिंग प्लांट में 15 गांवों के किसानों का दूध स्वीकार करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मदर डेयरी के दिल्ली मुख्यालय से भी चर्चा की गई है। जिलाधिकारी वानमथी सी. के समन्वय से सोमवार से दूध संग्रहण शुरू हो गया है। गोरस भंडार की व्यवस्था सामान्य होने तक मदर डेयरी किसानों का दूध खरीदती रहेगी।
एफडीए का पक्ष : संस्था बंद नहीं, सुधार उद्देश्य
एफडीए के अधिकारियों का कहना है कि गोरस भंडार किसानों के लिए महत्वपूर्ण संस्था है, लेकिन उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई संस्था को बंद करने के लिए नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों में सुधार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस मिलने के बाद संस्था को आवश्यक सुधार करने, स्वच्छता मानकों को अद्यतन करने और पुनः निरीक्षण के लिए आवेदन करने का पूरा अधिकार है। उनका कहना है कि महात्मा गांधी की प्रेरणा से शुरू हुई इस संस्था का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब वह कानून और गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराएगी।












