डॉक्टरों और अस्पताल की टीम का महत्वपूर्ण योगदान
लोकवाहिनी संवाददाता
अमरावती। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल चांदूर रेलवे के 31 वर्षीय युवक धीरज संतोष कलावते को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया. बेटे की मौत के गम के बीच परिवार ने हिम्मत दिखाते हुए अंगदान का निर्णय लिया. इस निर्णय से तीन जरूरतमंद मरीजों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बनी है. धीरज का लीवर और दोनों किडनियां जरूरतमंद मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गईं.
धीरज कलावते की कार का 12 अगस्त को शेंदूरजना खुर्द से चांदूर रेलवे मार्ग पर दुर्घटना हो गई थी. हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें तत्काल चांदूर रेलवे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत गंभीर होने के कारण उसी रात उन्हें अमरावती के ‘रीम्स’ अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां तीन दिनों तक उपचार चला. इसके बाद 15 अगस्त को धीरज को रेडियंट अस्पताल में भर्ती कराया गया. उपचार के दौरान 18 अगस्त को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया. धीरज की असामयिक मृत्यु कलावते परिवार के लिए बेहद दुखद थी. इस कठिन समय में डॉक्टरों ने परिवार को अंगदान की प्रक्रिया और उसके महत्व की जानकारी दी. परिवार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए अंगदान के लिए सहमति दे दी. परिवार के इस मानवीय निर्णय की सराहना की जा रही है.
परिस्थिति में लिए गए इस फैसले से तीन जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली है. बुधवार सुबह अंगदान और अंग संकलन की प्रक्रिया पूरी की गई. इसमें एक लीवर और दो किडनियां जरूरतमंद मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गईं. लीवर के लिए न्यू इ्रा हॉस्पिटल, नागपुर; एक किडनी के लिए किम्स किंग्सवे हॉस्पिटल, नागपुर तथा दूसरी किडनी के लिए रीम्स हॉस्पिटल, अमरावती की विशेषज्ञ टीम ने अंग संकलन की प्रक्रिया पूरी की.
डॉक्टरों और अस्पताल की टीम का महत्वपूर्ण योगदान
पूरी प्रक्रिया में डॉ. राहुल सक्सेना, डॉ. अक्षय सूर्यवंशी, डॉ. शुभम चव्हाण, डॉ. हितेश गुल्हानी, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सिकंदर अडवाणी, न्यूरोसर्जन डॉ. आनंद काकाणी सहित रेडियंट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों, नर्सिंग, तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रेडियंट अस्पताल में अब तक पांच मरीजों के अंगदान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. वर्तमान में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में किडनी की सबसे अधिक जरूरत है और बड़ी संख्या में मरीज प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं. धीरज के परिवार का यह निर्णय इस बात का उदाहरण है कि गहरे दुख के बीच भी लिया गया एक मानवीय फैसला कई परिवारों के जीवन में उम्मीद की किरण ला सकता है.










