जरांगे को कोई भी नया आश्वासन बंद दरवाजों के पीछे नहीं दिया गया : मुख्यमंत्री फडणवीस
लोकवाहिनी, संवाददाता:अहिल्यानगर। महाराष्ट्र के महायुति सरकार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि राज्य में मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका यह बयान मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे द्वारा अपना अनिश्चितकालीन आंदोलन वापस लेने के बीच आया है। जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। सरकार की ओर से उन्हें 12-सूत्री प्रस्ताव सौंपा गया। जरांगे ने शनिवार सुबह जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसे उन्होंने आधी रात के कुछ देर बाद समाप्त कर दिया। पिछले तीन वर्षों में यह उनकी नौवीं भूख हड़ताल थी। अनशन वापस लेने के सवालों पर फडणवीस ने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पहले से ही सार्वजनिक है और कोई नयी प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है।
पाटिल (सरकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य) ने भी उन्हें पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का निरंतर रुख मराठा समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित करना रहा है। हमने इसी रुख के अनुरूप कार्य किया है। इससे पहले, पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, फडणवीस ने उनकी विरासत से जुड़े स्थलों के संरक्षण के लिए राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, मैं उन सभी लोगों के सामने नतमस्तक हूं, जिन्होंने बार-बार हुए आक्रमणों के बावजूद इस देश में हिंदू पहचान को जीवित रखा और सनातन धर्म को संरक्षित किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के बाद सुशासन का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ने प्रस्तुत किया।
हालांकि, फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण पर कोई भी निर्णय संविधान और उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना लिए गए निर्णय भले ही प्रचार बटोर लें, लेकिन वे कानून की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे। इसलिए, हम केवल कानूनी रूप से मान्य निर्णय ही लेंगे। ओबीसी समुदाय की चिंताओं को दूर करते हुए, फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार एक समुदाय से लाभ छीनकर दूसरे समुदाय को नहीं देगी। उन्होंने कहा, ओबीसी समुदाय को डरने की कोई जरूरत नहीं है। मराठा समुदाय से संबंधित निर्णय लेते समय, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ओबीसी समुदाय के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। मुख्यमंत्री की ये टिप्पणी मराठा आरक्षण को लेकर चल रही चर्चाओं और मांगों के बीच आई है, साथ ही इस मुद्दे पर विभिन्न ओबीसी संगठनों द्वारा जताई गई चिंताओं के संदर्भ में भी है।













