457 मतदाताओं ने निभाया लोकतांत्रिक दायित्व
लोकवाहिनी, संवाददाता
गोंदिया। महाराष्ट्र विधान परिषद के भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में गुरुवार को लोकतंत्र का उत्सव पूरे उत्साह के साथ देखने को मिला। निर्वाचन क्षेत्र के सभी 457 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए 100 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड दर्ज किया। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों की इस सक्रिय भागीदारी ने चुनाव प्रक्रिया को विशेष महत्व प्रदान किया है।
निर्वाचन निर्णय अधिकारी एवं जिलाधिकारी सावन कुमार के अनुसार, सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक भंडारा और गोंदिया जिले के सभी चार मतदान केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुआ। प्रशासन द्वारा किए गए सटीक नियोजन और सुरक्षा प्रबंधों के कारण पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की गई। भंडारा स्थित उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के मतदान केंद्र पर 166 में से 166 मतदाताओं ने मतदान किया। वहीं साकोली केंद्र पर 61 में से 61, गोंदिया जिला कलेक्टर कार्यालय स्थित केंद्र पर 154 में से 154 तथा सड़क-अर्जुनी केंद्र पर 76 में से 76 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कुल 224 पुरुष और 233 महिला मतदाताओं सहित सभी 457 मतदाताओं ने मतदान कर प्रत्येक केंद्र पर शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित किया। मतदान समाप्त होने के बाद राजनीतिक हलकों में परिणामों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महायुति के वरिष्ठ नेता एवं सांसद राजेंद्र जैन ने दावा किया है कि महायुति समर्थित उम्मीदवार अविनाश ब्राह्मणकर 300 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज करेंगे।
■ नाना पटोले और परिमय फुके की प्रतिष्ठा दांव पर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव को कांग्रेस विधायक नाना पटोले और भाजपा विधायक डॉ. परिमय फुके की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यही कारण है कि यह मुकाबला केवल एक सीट तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा बन गया है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें 22 जून को होने वाली मतगणना पर टिकी है। जीत के दावे, वोटों का गणित और कार्यकर्ताओं की बढ़ती उत्सुकता के बीच भंडारा-गोंदिया के राजनीतिक माहौल में सरगर्मी बढ़ गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतपेटियों में बंद जनप्रतिनिधियों का फैसला किस उम्मीदवार के पक्ष में जाता है। इस चुनाव में महायुति की ओर से भाजपा के अविनाश ब्राह्मणकर मैदान में हैं। वहीं महाविकास आघाड़ी ने प्रारंभ में पूर्व विधायक दिलीप बनसोड को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनके नामांकन वापस लेने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार नरेश ईश्वरकर को समर्थन देने का निर्णय लिया। इसके अलावा सचिन कुंभलकर भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
■ 6 पार्षदों ने की क्रॉस वोटिंग
अमरावती। अमरावती विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। पार्टी द्वारा जारी तटस्थ रहने के आधिकारिक व्हिप को कांग्रेस के ही कुछ पार्षदों ने दरकिनार कर दिया। इतना ही नहीं, कुछ पार्षद कथित तौर पर चेहरे ढककर मतदान केंद्र पहुंचे और पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया। इस घटनाक्रम ने अमरावती में कांग्रेस संगठन को बड़ा झटका दिया है। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के 16 पार्षदों में से 6 पार्षदों ने पार्टी के तटस्थ रहने के निर्देश को नजरअंदाज करते हुए मतदान किया। इनमें धीरज हिवसे, जयश्री जठाले, लुबना तनवीर, अप्सरा जहां सादिक शाह, विकी वानखड़े और प्रशांत महाले के नाम शामिल हैं। इन पार्षदों के मतदान से कांग्रेस की रणनीति को नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर के गृह क्षेत्र तिवसा में भी पार्टी को झटका लगा।
तिवसा नगर पंचायत के 14 कांग्रेस पार्षदों में से 3 पार्षदों ने पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान किया, जबकि 11 पार्षद तटस्थ रहे। पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वालों में सीमा खाकसे, सचिन बोरे और संगीता राउत शामिल हैं। अमरावती विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने हर्षजीत देशमुख को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे और वंचित बहुजन आघाडी की ओर से निलेश विश्वकर्मा मैदान में हैं। राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि चुनाव के अंतिम चरण तक कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दी, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ा और कई पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग का रास्ता चुना। चुनाव के दौरान सामने आई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अमरावती और तिवसा जैसे क्षेत्रों में हुई बगावत ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है और संबंधित पार्षदों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।












