खाता खोलने के बहाने बैंक खाते का दुरुपयोग, 60 हजार लोन का झांसा, दर्जनों महिलाएं ठगी का शिकार
लोकवार्हनी, शहर प्रतिनिधि
नागपुर। गरीबों के दस्तावेज़ लेकर उनके नाम पर कुछ रुपये लेकर बैंक खाते खोले गए और उन खातों से करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए गए। गौरतलब है कि नागपुर में एक ही दिन दो पास के पुलिस थानों में मामला सामने आया हैं। नागपुर और अन्य जगहों पर कई सालों से एक संगठित गिरोह सक्रिय है जो किराए के बैंक खाते खोलकर करोड़ों का लेन-देन करता है। आतंकी फंड, साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन, क्रिकेट सट्टेबाजी, ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला और काले धन का लेन-देन इसी खाते के जरिए होता है। यह सब गुमनाम तरीके से किया जाता है, इसलिए दूसरों को इसकी भनक तक नहीं लगती। नागपुर में 60 हजार रुपये का लोन दिलाने का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों रुपये के वित्तीय फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
खास बात यह है कि एक ही महिला आरोपी के खिलाफ शांतीनगर और तहसील थाना क्षेत्र में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह ठगी का संगठित नेटवर्क है, जिसमें कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं। आरोपी मंदा गोपालराव गुम्गांवकर (42) महिलाओं का विश्वास जीतकर उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज और दो-दो हजार रुपये लेकर 60 हजार रुपये का लोन दिलाने का झांसा देती थी। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनकी जानकारी के बिना बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किया जाता था। शांतीनगर थाने में दर्ज मामले के अनुसार, फरियादी मानसी विजय निमजे (28) की पहचान आरोपी से बस्ती में रहने वाली एक महिला के माध्यम से हुई थी। बचत समूह के लेन-देन के कारण दोनों के बीच विश्वास कायम हो गया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने फरियादी के नाम पर गांधीबाग स्थित एसबीसी को-ऑपरेटिव बैंक में खाता खुलवाया और उसकी जानकारी के बिना 17 लाख 85 हजार 500 रुपये का वित्तीय लेन-देन कर आर्थिक ठगी की। वहीं तहसील थाना में दर्ज दूसरे मामले में फरियादी नंदा नितिन बंडेकर (38) ने शिकायत दी है कि आरोपी ने 60 हजार रुपये का लोन मंजूर कराने का लालच देकर दस्तावेज और दो हजार रुपये लिए। इसके बाद उसी बस्ती की 39 अन्य महिलाओं से भी इसी तरह दस्तावेज और रकम जमा कराई गई।
आरोप है कि आरोपी ने अपने साथी शुभम (40) के साथ मिलकर 15 महिलाओं के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनकी जानकारी के बिना करीब 7 करोड़ 50 लाख 78 हजार 981 रुपये का वित्तीय लेन-देन किया। दोनों मामलों में पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल है तथा अब तक कितनी महिलाओं को इस गिरोह ने ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस बैंक खातों, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी जरूरतमंद नागरिकों और छात्रों को 2 हजार से 3 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाते खुल जाने के बाद, संबंधित बैंकिंग दस्तावेजों को कथित तौर पर गिरोह के अन्य सदस्यों को बेच दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों से जुड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया था। जांच में जिन नामों का जिक्र हुआ उनमें महादेव ऐप, विन अड्डा, फेयरप्ले, लोटस 365 और रेड्डी अन्ना शामिल हैं। शिकायत और उसके बाद की जांच से ऐसे पैटर्न का पता चला जिसमें खाताधारकों को मुखौटे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जबकि खातों और दस्तावेजों पर नियंत्रण आरोपी के पास ही रहता था।











