अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की स्मृतियों को नमन
लोकवाहिनी, संवाददाता
गड़चिरोली। कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की स्मृतियों को नमन करते हुए गड़चिरोली शहर के बाजार चौक स्थित कारगिल चौक पर 27वां कारगिल विजय दिवस बड़े उत्साह और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। शासकीय पुनर्नियुक्त पूर्व सैनिक संगठन जिला गड़चिरोली, आजी-माजी सैनिक संगठन तथा कारगिल चौक दुर्गा उत्सव मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शहीद जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत गांधी चौक से कारगिल चौक तक निकाली गई भव्य कारगिल विजय दिवस रैली से हुई। हाथों में तिरंगा लेकर नागरिकों, विद्यार्थियों और पूर्व सैनिकों ने देशभक्ति के नारों के साथ रैली में उत्स्फूर्त भागीदारी की। इसके बाद कारगिल स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर एनसीसी विद्यार्थियों ने अनुशासन संचलन और आकर्षक कवायत का प्रदर्शन किया। देशभक्ति से ओतप्रोत इस प्रस्तुति का उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। आयोजकों की ओर से सहभागी विद्यार्थियों को नोटबुक वितरित कर उनका सम्मान किया गया।
सैनिकों का बलिदान देश के लिए प्रेरणादायी : डॉ. अशोक नेते
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद एवं भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अशोक नेते ने कारगिल युद्ध के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं में माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय साहस दिखाकर दुश्मन को पराजित किया और कारगिल की चोटियों पर तिरंगा गर्व से फहराया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के बलिदान के कारण ही देशवासी आज सुरक्षित और स्वतंत्र भारत में जीवन जी रहे हैं। सैनिक राष्ट्र के वास्तविक आधार स्तंभ हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक समाजसेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। शहीद जवानों का बलिदान और उनके परिवारों का त्याग पूरे देश के लिए हमेशा प्रेरणा और सम्मान का विषय रहेगा।
डॉ. नेते ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कर्तव्य निभाते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले गड़चिरोली जिले के कुरखेड़ा तहसील अंतर्गत मরতोला निवासी जवान सुरेश आंबादकर को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश की रक्षा में बलिदान देने वाले सभी वीर जवानों के शौर्य को नमन करते हुए उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ. अशोक नेते, गड़चिरोली विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, नगराध्यक्ष एडवोकेट प्रगती सागर निमबोकर, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी के प्रतिनिधि कर्नल रामनाथ स्वामी, पूर्व नगराध्यक्ष एवं नगरसेविका योगिता पिपरे, कारगिल स्मारक समिति के संस्थापक उदय धकाते, शासकीय पुनर्नियुक्त पूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष होमराज डोनालकर, कारगिल समिति अध्यक्ष ऋषि बंजारी, वीरपत्नी सुधा चंदनखेड़े, आरमोरी की चंदा राऊत, घिसुलाल काबरा, चंद्रशेखर भंडोगे सहित बड़ी संख्या में आजी-माजी सैनिक, वीर परिवार, जनप्रतिनिधि और देशभक्त नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं प्रस्तावना आयोजक समिति के पदाधिकारियों ने की। राष्ट्रगान, महाराष्ट्र गीत, वंदे मातरम्, भारत माता की जय और भारतीय सेना जिंदाबाद के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे कारगिल चौक परिसर में देशभक्ति का वातावरण छाया रहा और उपस्थित लोगों ने शहीद जवानों की स्मृतियों को कृतज्ञतापूर्वक नमन किया।
वीर परिवारों का सम्मान
कार्यक्रम में देश के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद जवानों की वीरता, वीरपिता, वीरपत्नी तथा सैनिक परिवारों के साथ विभिन्न पुरस्कार प्राप्त पूर्व सैनिकों का सम्मानचिहन देकर सत्कार किया गया। उपस्थित लोगों ने खड़े होकरवीर परिवारों के त्याग और समर्पण को नमन किया।
सैनिक स्कूल में देशभक्ति का माहौल
बल्लारपुर। कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों के शौर्य, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए सैनिक स्कूल चंद्रपुर में रविवार, 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस उत्साहपूर्ण और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के प्राचार्य कैप्टन (भारतीय नौसेना) अश्विन अनुपदेव, उपप्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल रुबी दीक्षित, प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर रजत जी, शिक्षणगण, कर्मचारी और सभी कैडेट्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल परिसर स्थित बैटल ऑनर मेमोरियल पर हुई, जहां प्राचार्य कैप्टन अश्विन अनुपदेव ने पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कैडेट्स ने औपचारिक मानवंदना देकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दौरान कारगिल युद्ध की वीरगाथाओं को याद करते हुए भारतीय सशस्त्र सेनाओं के साहस, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा का गौरव किया गया। कैडेट्स को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने तथा देशसेवा के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया गया।










