शिक्षक ने शुरू किया ‘भीख मांगो आंदोलन’
लोकवाहिनी, संवाददाता
आरमोरी/गढ़चिरोली। जिले के आरमोरी तहसील के थोटेबोडी स्थित जिला परिषद उच्च प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के लिए खाद्यान्न का भंडार समाप्त हो जाने से विद्यार्थियों के भोजन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. सरकारी स्तर पर पोषण आहार की आपूर्ति और टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी के विरोध में विद्यालय के शिक्षक नंदकुमार (नंदकिशोर) मसराम ने मंगलवार, 28 जुलाई से स्कूल परिसर के बाहर ‘भीख मांगो आंदोलन’ शुरू कर दिया है. विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक लगभग 81 से 85 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और पूरे स्कूल की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक पर है. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन पोषण आहार की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने से मध्याह्न भोजन योजना शुरू नहीं हो सकी है. विद्यार्थियों को भूखा न रहने देने के उद्देश्य से शिक्षक नंदकुमार मसराम ने अनोखी पहल करते हुए गांव में घर-घर जाकर अनाज, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री दान के रूप में जुटाना शुरू किया है. एकत्रित सामग्री से प्रतिदिन बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार कराया जा रहा है. शासन की जिम्मेदारी स्वयं उठाकर बच्चों की थाली तक भोजन पहुंचाने का उनका प्रयास लोगों को भावुक कर रहा है. मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाना और कुपोषण को कम करना है. लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण जिले की कई जिला परिषद स्कूलों में यह योजना अब तक शुरू नहीं हो पाई है. इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण, गरीब और आदिवासी विद्यार्थियों पर पड़ रहा है.
एक दिन के भोजन की हुई व्यवस्था
थोटेबोडी का यह विद्यालय अपने नवाचारों के लिए जिले में विशेष पहचान रखता है. एकमात्र शिक्षक विद्यार्थियों को मराठी, हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाते हैं. स्कूल में डिजिटल और स्मार्ट कक्षाएं, विद्यालय में ही पढ़ाई पूरी कराने की व्यवस्था, तबला, हारमोनियम और चित्रकला जैसी कलाओं का प्रशिक्षण तथा गर्मी की छुट्टियों में नवोदय परीक्षा की तैयारी जैसे कई नवाचार संचालित किए जाते हैं. शिक्षक द्वारा शुरू किए गए ‘भीख मांगो आंदोलन’ से फिलहाल एक दिन के भोजन की व्यवस्था हो गई है, लेकिन आने वाले दिनों में विद्यार्थियों के भोजन की व्यवस्था कैसे होगी, यह सवाल अभी भी बना हुआ है.









