मुख्यमंत्री फडणवीस और शिंदे ने वंशजों को किया सम्मानित
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। मुंबई में सामाजिक समरसता और लोककला के महान प्रतीक साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्भाऊ साठे की स्मृति में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA), बृहन्मुंबई द्वारा विकसित की जा रही साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्भाऊ साठे अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान की महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन और कोइनशिला अनावरण भव्य समारोह में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संयुक्त रूप से परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. रामदास आठवले, विधानपरिषद के उप सभापति सचिन अहिर, मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, मंत्री एड. आशिष शेलार, मंत्री संजय शिरसाट, सांसद संजय पाटील, विधायक अमित साटम, मुंबई की महापौर रितु तावडे एवं अन्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लोकशाहीर अण्भाऊ साठे के वंशजों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में अण्भाऊ साठे की बहू सावित्रीबाई साठे, पोतियां ज्योति साठे व आरती साठे और पौत्र सचिन साठे शामिल थे। इसके साथ ही, हाल ही में UPSC जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का परचम लहराने वाली होनहार छात्रा प्रेरणा खवले को भी उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस महत्वाकांक्षी साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्भाऊ साठे अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया। इनमें सहायक अभियंता अमोल साळुंखे, जूनियर इंजीनियर अजय सोनावणे, ओएसडी विनोद तिरहेकर और प्रकाश बिरजे को सम्मानित किया गया।
1000 लड़कियों को मुख्यमंत्री के हस्ते सुकन्या समृद्धि योजना के चेक वितरित
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों आज एक हजार लड़कियों को सुकन्या समृद्धि योजना के चेक वितरित किए गए। अब इन एक हजार लड़कियों के बैंक खातों में हर वर्ष 20 हजार रुपये जमा किए जाएंगे। ये राशि लगातार अगले दस वर्ष तक सरकार की ओर से जमा की जाएगी। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत एक हजार लड़कियों के बैंक खाते खोले गए हैं। आज का कार्यक्रम नए युग की शुरुआत है। 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का विचार दिया। बीच के समय में कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं हुईं और लड़कियों को बोझ समझा जाने लगा। अब उसके दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है। विकसित भारत का सपना देखते समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जिन देशों ने प्रगति की है, उनकी प्रगति में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी रही है। यह बात फडणवीस ने अपने संबोधन में कही।
महिलाओं के साथ असमान व्यवहार किए जाने के कारण हमारा देश एक हजार वर्षों तक पराधीन रहा, ऐसा फडणवीस ने कहा। आगे उन्होंने कहा कि समाज को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ योजनाएँ शुरू की गई हैं। लड़कियों के बचत खाते खोले गए हैं, जिनमें सरकार ने राशि जमा की है और उस पर साढे आठ प्रतिशत ब्याज मिलेगा। इस राशि पर कोई कर नहीं लगेगा। जब लड़की 18 वर्ष की होगी, तब यह राशि उसे मिलेगी। पश्चिमी विचारधारा से भारत की संस्कृति अलग है, उसका दृष्टिकोण अलग है। ‘जिसमें ताकत होगी वही बचेगा’, यह पश्चिमी सोच है, लेकिन भारत में ऐसा विचार नहीं है। जो जन्म लेता है, उसे जीने का अधिकार है और वह जीवित रहेगा, यही भारत की संस्कृति और विचार है, ऐसा फडणवीस ने कहा।











