ब्रिक्स समिट से पहले भारत का चीन को जवाब
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत ने चीन को बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। चीन की नाम बदलने की कोशिशों के बीच सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने अपडेटेड मैप में राज्य की 27 जगहों के स्टैंडर्ड नाम और पहचान तय कर दी। इनमें चार अहम पहाड़ी दरें, एक ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियल झील और एक स्मारक शामिल हैं। बता दें कि, सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने वाला है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है, इसलिए इस कदम का कूटनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
केंद्र सरकार की रणनीति के तहत, ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ के अपडेटेड मैप में अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों के लिए स्टैंडर्ड नाम और पहचान तय की गई है। इस रणनीति का मकसद इलाके की सीमा तय करने को लेकर किसी भी तरह के कन्फ्यूजन को दूर करना और मैकमोहन लाइन के इस तरफ की जगहों के नाम बदलने की चीन की बार-बार की कोशिशों का जवाब देना है। सरकार ने चार पहाड़ी दरें शामिल किए हैं- दूजो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला। थग ला खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती चरण में यहां लड़ाई हुई थी।
एक झील सांबो सरोवर को भारतीय नाम के साथ चिन्हित किया गया है। बाकी 21 स्थानों में लोंग जू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं। भारत के आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था।












