इसमें रिटायर्ड जज, सीबीआई-पुलिस के पूर्व अफसर शामिल, पैलेटगन चलाने और महिलाओं से बदसलूकी का मामला
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को पांच सदस्यीय एक उच्चधिकार प्राप्त समिति का गठन किया, जो हाल में राष्ट्रीय राजधानी में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा के आरोपों की जांच करेगी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस समिति में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एल.आर. बिश्नोई भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, इस एचपीईसी (उच्चधिकार प्राप्त जांच समिति) का गठन कई तरह के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है जिसमें समिति के हर सदस्य की अपनी विशेषता और अनुभव के साथ-साथ समिति की विविधता और अन्य कारक भी शामिल हैं।
ईडी की शक्तियों पर सुनवाई करेगा न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उन याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, जिनमें धनशोधन मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को गिरफ्तार करने, संपत्ति कुर्क करने और तलाशी एवं जब्ती की शक्ति देने वाले 2022 के फैसले पर पुनרוविचार का अनुरोध किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर संज्ञान लिया। सिब्बल कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश हुए और उन्होंने कहा कि इन याचिकाओं पर अगस्त 2022 में ही नोटिस जारी हो चुके थे और अब इन पर सुनवाई की जरूरत है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, मामले को पीठ के निर्धारण को लेकर पक्षकारों की सहमति दर्ज करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि मामलों को उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना है जिसने पहले इन पर सुनवाई की थी, तो तीन मौजूदा पीठों का पुनर्गठन करना होगा, क्योंकि अन्य दो न्यायाधीश अब अलग-अलग पीठों में सुनवाई कर रहे हैं।













