3000 की दवा 27000 में बेचने पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
लोकावाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं और अन्य औषधियों की कीमतों में भारी मुनाफावसूली को लेकर केंद्र सरकार से पूछा है कि दवाओं की एमआरपी (न्यूनतम खुदरा मूल्य), खुदरा मूल्य (रिटेल प्राइस) पर अधिकतम 16 प्रतिशत तक सीमित होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें दवाओं की कीमतों का नियमन करने, जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल और मेडिकल उपकरणों को ड्रग्स मूल्य नियंत्रण आदेश (डিপিसीओ) कानून, 2023 को लेकर चिंता जताई गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कीमतों को रिटेल प्राइस के 16 प्रतिशत तक ही सीमित करने का सुझाव दिया। जस्टिस मेहता ने कहा कि कैंसर की एक दवा का खुदरा मूल्य तीन हजार रुपये है, लेकिन उसी दवा की एमआरपी 27 हजार रुपये है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा अंतर है। सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं पर मुनाफाखोरी को लेकर गहरी चिंता जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने डিপিसीओ के तहत जरूरी और गैर जरूरी दवाओं को
लेकर भी सवाल उठाए। याचिका में कहा गया है कि कॉरपोरेट अस्पताल अक्सर सरकारी योजनाओं के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को इन-हाउस फार्मेसी से दवाएं खरीदने के लिए कहते हैं और ऊंची कीमत पर दवाएं खरीदने का बोझ अक्सर गरीब परिवारों पर पड़ता है, जो उन्हें अपनी जेब से चुकाना होता है। केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर
आरोपी के इकबालिया बयान को रासुका के तहत हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि किसी आरोपी के इकबालिया बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसे हिरासत में रखने का आधार नहीं बनाया जा सकता। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सील नागू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए मुल्ला अफरोज की एहतियातन हिरासत को रद्द कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2024 में संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मुल्ला अफरोज की कथित भूमिका को लेकर अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की थी। उच्चतम न्यायालय ने अवैध एहतियातन हिरासत आदेश पारित करने के लिए सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस संबंध में विस्तृत फैसले की प्रति की प्रतीक्षा है। यह फैसला सुनाने के दौरान न्यायमूर्ति दत्ता ने अपने विधि लिपिक को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका अपने 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले निधन हो गया। उल्लेखनीय है कि रासुका केंद्र और राज्य सरकारों को व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, ताकि उन्हें भारत की रक्षा के लिए प्रतिकूल तरीके से कार्य करने से रोका जा सके।
जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर संतुलित रास्ता निकाला जाएगा। तुषार मेहता ने कहा कि मैं ये नहीं कह रहा कि याचिकाकर्ता सही या गलत हैं, लेकिन बीच का रास्ता निकालना होगा। जहां तक मेरी जानकारी है कि फार्मा कंपनियों को इससे फायदा नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब 12 अक्तूबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा। (पेज 6 पर)













