बुलढाणा। किसानों की कर्जमाफी सहित विभिन्न मांगों को लेकर 27 अगस्त को मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन से पहले किसान नेता रविकांत तुपकर को बुलढाणा शहर पुलिस ने कड़ी नोटिस जारी की है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 168 के तहत जारी इस नोटिस में आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। बुलढाणा शहर पुलिस थाने के निरीक्षक संग्राम पाटील ने स्वयं तुपकर को नोटिस सौंपी।
क्रांतिकारी किसान संगठन के अध्यक्ष रविकांत तुपकर ने किसानों की मांगों पर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने पर 27 अगस्त को मुंबई स्थित मंत्रालय परिसर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने मंत्रियों के सरकारी बंगलों और सरकारी वाहनों को प्रतीकात्मक रूप से जब्त कर उनकी सार्वजनिक नीलामी करने की घोषणा भी की है। पुलिस प्रशासन ने आंदोलन की गंभीरता और संगठन के पिछले मुंबई आंदोलन के अनुभव को देखते हुए पहले ही तुपकर को प्रतिबंधात्मक नोटिस जारी की है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन को लेकर माहौल और गरमाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने नोटिस के जरिए तुपकर को निर्देश दिया है कि आंदोलन के दौरान ऐसा कोई कृत्य न किया जाए, जिससे संज्ञेय अपराध हो या सार्वजनिक शांति भंग हो। इसके अलावा सरकारी बंगले, कार्यालय या सरकारी वाहनों पर अनधिकृत कब्जा, रास्ते में बाधा, नुकसान पहुंचाने या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष कार्रवाई से बचने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी अनुचित घटना की स्थिति में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
‘नोटिस से किसानों की आवाज नहीं दबेगी’
नोटिस मिलने के बाद रविकांत तुपकर ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह की नोटिस उनके लिए नई नहीं हैं। और केवल नोटिस देकर किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अपने अधिकारों और न्याय के लिए आंदोलन करने का अधिकार देता है और इस अधिकार को कोई नहीं छीन सकता। तुपकर ने कहा कि वे किसानों की न्यायसंगत मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और केवल पुलिस की नोटिस जारी करने से उन्हें आंदोलन से पीछे नहीं हटाया जा सकता। तुपकर ने स्पष्ट किया है कि सरकार और प्रशासन की ओर से दबाव बनाए जाने के बावजूद आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को मुंबई में आंदोलन होगा और किसानों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। पुलिस की प्रतिबंधात्मक नोटिस और तुपकर के आक्रामक रुख के कारण अब 27 अगस्त को होने वाले मुंबई आंदोलन पर पूरे राज्य के किसानों की नजर है।
इन मांगों को लेकर आंदोलन
रविकांत तुपकर की प्रमुख मांगों में नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये के बजाय 2 लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान देना शामिल है। इसके अलावा आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वाले किसानों को भी कर्जमाफी के दायरे में लाने की मांग की गई है। वर्ष 2009, 2017 और 2019 की कर्जमाफी से वंचित पात्र किसानों को लाभ देने, कर्ज पुनर्गठन के कारण कर्जमाफी से बाहर रह गए किसानों को योजना में शामिल करने तथा वन टाइम सेटलमेंट (OTS) के कारण किसानों का सिबिल स्कोर खराब न हो, इसकी गारंटी देने की भी मांग है। तुपकर का कहना है कि सरकार को किसानों की इन मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने मांगें नहीं माने जाने की स्थिति में मंत्रियों के सरकारी बंगलों और वाहनों की सार्वजनिक नीलामी करने की अपनी घोषणा पर कायम रहने की बात कही है।














