मृतकों में 6 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल
लोकवाहिनी, संवाददाता
भंडारा। भंडारा जिले के लाखनी साकोली तालुका के पिंपलगांव के पास आयशर ट्रक और ट्रैक्स गाड़ी के बीच हुए भीषण हादसे में 8 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हादसे में मारे गए सभी लोग छत्तीसगढ़ राज्य के मजदूर होने की जानकारी सामने आई है।
मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कुछ मजदूर ट्रैक्स गाड़ी से नागपुर की दिशा में यात्रा कर रहे थे। पिंपलगांव स्थित एक पेट्रोल पंप से एक आयशर ट्रक सड़क पर निकल रहा था, तभी पीछे से आ रहे ट्रैक्स चालक का गाड़ी पर से नियंत्रण छूट गया। तेज रफ्तार ट्रैक्स सीधे आयशर ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्स गाड़ी पूरी तरह चकनाचूर हो हो गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में ट्रैक्स में सवार 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही नेशनल हाईवे पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। मृतकों में 6 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं। 55 वर्षीय एक महिला समेत मृत हुई बाकी सभी महिलाएं 35 वर्ष की आयु वर्ग की हैं। वहीं, 3 बच्चे सभी 5 वर्ष से कम उम्र के हैं। हादसे की शिकार सभी महिलाएं छत्तीसगढ़ से नागपुर स्थित अपने मायके तीज उत्सव के लिए आ रही थीं, तभी यह भीषण हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिंपलगांव के पास तड़के शुक्रवार को हुआ। सोमनाथ वर्मा नामक व्यक्ति के परिवार की मां, बहन, भांजी और बहन की जेठानी, ऐसे चार लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई है।
मायके की राह पर ही तीन पीढ़ियों का अंत!
नियति ने मां, बेटी के साथ नातिन को भी छीन लिया
ससुराल गई बेटी को तीज के त्योहार पर मायके लाने की छत्तीसगढ़ में प्रथा है। इसके लिए नागपुर से जामबाई वर्मा अपनी बेटी मीनाक्षी और नातिन ग्रेशा दोनों को मायके ले जाने के लिए छत्तीसगढ़ गई थीं। 14 तारीख को तीज का त्योहार मनाना था, इसी लालसा में मां-बेटियों का सफर नागपुर की दिशा में शुरू हुआ। गाड़ी में जामबाई बेटी मीनाक्षी के बगल में बैठी थी, जबकि मीनाक्षी की नन्हीं ग्रेशा उसकी गोद में लेटी थी। लेकिन मायके की دہलीज तक पहुंचने से पहले ही भोर के अंधेरे में काल ने रास्ता रोक लिया और जामबाई, मीनाक्षी और उसकी नन्हीं बेटी ग्रेशा, एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों का दुर्भाग्यपूर्ण अंत हो गया। मीनाक्षी की जेठानी सरिता की भी मौके पर ही मौत हो गई। तीज की खुशी के लिए शुरू हुआ सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
छत्तीसगढ़ में तीज त्योहार का विशेष महत्व है। तीज केवल त्योहार नहीं, बल्कि मायके और बेटी के रिश्ते को फिर से उजाला देने वाला दिन है। ससुराल गई बेटियों को मायके लाकर उनके अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना की जाती है। इसलिए बेटी को मायके लाने के लिए मां, भाई या परिवार के सदस्य खुद ससुराल जाते हैं। नागपुर में काम के सिलसिले में बसे कई छत्तीसगढ़ी परिवारों की बेटियों के विवाह छत्तीसगढ़ में हुए हैं। इसी परंपरा के अनुसार विचारपुर और आसपास की महिलाएं अपने बच्चों के साथ मीनाक्षी की जेठानी सरिता का भाई गुलशन भी गया था। 13 सितंबर को तीज होने के कारण त्योहार से दो दिन पहले शुरू हुआ यह सफर आनंदमय हो, ऐसी ही उम्मीद थी। लेकिन पिंपलगांव ने इस सफर की पूरी तस्वीर ही बदल दी।











