नागपुर। स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन के प्रति स्कूल प्रशासकों और चालकों की लापरवाही का चौंकाने वाला सच एक बार फिर सामने आया है। नागपुर शहर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के गति परीक्षण दल द्वारा चलाए गए निरीक्षण अभियान में 277 स्कूल बसें दोषी पाई गईं और उनके खिलाफ ई-चालान जारी करने के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि आरटीओ ने बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाली 44 स्कूल बसों के लाइसेंस और पंजीकरण स्थायी रूप से रद्द करके उन्हें करारा झटका दिया है.
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी किरण बिडकर के नेतृत्व में स्पीड स्क्वाड ने शहर की कुल 1,729 स्कूल बसों की गहन तलाशी ली। इसमें वाहन लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, वाहन कर, पीयूसी, अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा किट, आपातकालीन दरवाजा, चालक की वर्दी और क्षमता से अधिक छात्रों की मौजूदगी जैसे सभी मापदंडों की जांच की गई। गंभीर खामियां पाई जाने पर 10 बसों को तुरंत जब्त कर लिया गया। प्रशासन ने फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना वाहनों के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है और ऐसे वाहनों को सड़क पर देखते ही जब्त किया जा रहा है। यह कार्रवाई मोटर वाहन निरीक्षक तुषार बोबड़े, पवन बानबाकोडे, प्रताप राउत, कुणाल पाटिल, दाऊद मुशरीफ के साथ-साथ सहायक मोटर वाहन निरीक्षक नरेंद्र कुमार उमाले, भारत महाजन, प्रशांत मेश्राम, ओंकार मेश्राम और गीतांजलि आवले की टीम ने की.
16 अक्टूबर के बाद कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
स्कूल बस नियमों में 16 जुलाई को जारी संशोधित अधिसूचना के अनुसार, स्कूल बसों में पैनिक बटन, जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी, अग्नि सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, चालकों के नियमित प्रशिक्षण, चिकित्सा जांच, चरित्र सत्यापन और अभिभावकों को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने जैसे सुधारों के लिए 3 महीने का समय दिया गया है। यह अवधि समाप्त होते ही, यानी 16 अक्टूबर के बाद, आरटीओ शहर में फिर से विशेष निरीक्षण अभियान चलाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी किरण बिडकर ने भी इस संबंध में स्पष्ट चेतावनी दी है.














