पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही किसानों को मदद दी जाएगी : चंद्रशेखर बावनकुले
लोकवाहिनी, संवाददाता
यवतमाल। राज्य सरकार ने राज्य में 75 प्रतिशत सूखा घोषित किया है। सूखा राहत के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में एक उपसमिति भी गठित की है। इसलिए किसानों को जल्द आर्थिक मदद मिलेगी, ऐसी संभावना जताई जा रही थी, तभी एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। किसानों को तुरंत मदद नहीं मिलेगी, ऐसा बड़ा बयान चंद्रशेखर बावनकुले ने दिया है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही किसानों को मदद दी जाएगी। नहीं तो किसानों का नुकसान होगा, ऐसा चंद्रशेखर बावनकुले ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले यवतमाल आए थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सीधे प्रतिक्रिया दी। सूखा राहत से एक भी किसान वंचित न रहे, ऐसा हमारा प्रयास जारी है। पंचनामा करते समय उस क्षेत्र की स्थिति को ध्यान में रखकर राज्य का औसत नुकसान क्या है, यह देखकर हम मदद करते हैं। आखिर आज के आज मदद घोषित नहीं होगी। फसलों के पंचनामा होने देना होगा, स्थिति क्या है यह देखना होगा, तूर के लिए क्या मदद करनी चाहिए, कपास के लिए क्या मदद करनी चाहिए, सोयाबीन के लिए क्या मदद करनी चाहिए, हल्दी के लिए क्या मदद करनी चाहिए, बागवानों के लिए क्या मदद करनी चाहिए, संतरे के लिए क्या मदद करनी चाहिए इसके अलग-अलग पैरामीटर हैं। किसी ने कहा, आज के आज मदद घोषित कर दीजिए। मैंने कहा, किसानों का नुकसान हो गया तो? इसलिए पूरी रिपोर्ट आनी चाहिए। यही भूमिका है। पंचनामा के आधार पर मदद की जाती है। मुख्यमंत्री जल्द मदद घोषित करेंगे, ऐसा चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट किया।
हर मंगलवार समीक्षा
एनडीआरएफ की मदद के लिए पंचनामा सटीक होना महत्वपूर्ण है। पंचनामा सटीक हुआ तो किसानों को उचित मदद मिलती है। मंत्रिमंडल उपसमिति को सूखे की स्थिति का सटीक विवरण करना है। हर मंगलवार मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक होगी। इस दौरान सूखे की स्थिति की समीक्षा करेंगे, ऐसी जानकारी बावनकुले ने दी।
विपक्ष द्वारा की गई सूखे की राजनीति गलत है। किसान खेत मजदूरों पर सूखा है। सभी को एक साथ आकर सूखे की मार को समझना चाहिए। अपनी-अपनी ओर से सहायता निधि में मदद करनी चाहिए। किसानों का पहला हक सरकार पर है। सटीक पंचनामा हो, इसके लिए मेरा दौरा जारी है, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया। किसानों को 12 घंटे बिजली देने के संबंध में स्पष्ट आदेश महावितरण को दिए गए हैं। बिजली मिलने पर पर्याप्त पानी के भंडार से किसान सिंचाई कर सकते हैं। बिजली नहीं मिल रही हो तो उस पर मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में चर्चा की जाएगी, ऐसी जानकारी उन्होंने दी। सूखे को लेकर शरद पवार ने मुख्यमंत्री को पत्र दिया है। पत्र देना विपक्ष के रूप में उनका काम है। पवार ने पत्र दिया है इसलिए हम किसानों की मदद कर रहे हैं, ऐसा नहीं है। कई विधायकों ने भी ऐसे पत्र दिए हैं। तीनों दलों के नेताओं ने भी पत्र दिए हैं। 2000 से अधिक पत्र आए हैं। खुद मुख्यमंत्री किसानों के खेतों की मेड़ पर गए थे। उन्होंने निर्णय लिया है। सूखे की सूची से जो तालुके छूट गए हैं, उसका अध्ययन किया जाएगा, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया। (पेज 6 पर)













