सड़क, स्वास्थ्य और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
बुलढाणा। अपनी विभिन्न मांगों की ओर शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए आदिवासी समुदाय की ओर से सोमवार को बुलढाणा जिला कलेक्टर कार्यालय पर आक्रोश मार्च निकाला गया। अक्टूबर की तेज गर्मी के बीच निकाले गए इस मार्च में हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। इनमें युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से कड़ा बंदोबस्त किया गया था। आदिवासी समुदाय के लोगों ने कई घंटों तक जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने सड़क पर धरना दिया। इसके चलते व्यस्त जिला कलेक्टर कार्यालय मार्ग पर करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
मार्च के दौरान अगस्त में उपचार के अभाव में हुई एक गर्भवती महिला की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इस मामले को लेकर आदिवासी समुदाय में अभी भी नाराजगी कायम दिखाई दी। आदिवासी बहुल जलगांव तहसील के भिंगारा के पास स्थित दुर्गम आदिवासी बस्ती चालीसटपरी निवासी सादुरी राधेश्याम खरात की कथित तौर पर सर्पदंश के कारण मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, बस्ती तक सड़क नहीं होने के कारण महिला को झोली में डालकर अस्पताल ले जाना पड़ा। समय पर सर्पदंशरोधी दवा नहीं मिलने से महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत होने का आरोप लगाया गया। आदिवासी समुदाय ने इस मामले में जलगांव के सरकारी अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग की।












