पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पंप स्टोरेज परियोजनाएं महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र में कर्जत में प्रस्तावित टोरेंट पंप स्टोरेज परियोजना को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस परियोजना के लिए कर्जत और भीमाशंकर अभयारण्य में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। इस मुद्दे पर पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों की ओर से इस कार्रवाई का जोरदार विरोध किया जा रहा है। इसके अलावा, पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के प्राकृतिक आवास, जैव विविधता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विकास के नाम पर जंगलों और प्राकृतिक संपदा को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए विरोध तेज कर दिया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे, सांसद संजय राउत और सुषमा अंधारे ने हाल ही में कर्जत पहुंचकर परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई।
वहीं, महाराष्ट्र निर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी इस परियोजना के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है। वह 28 अक्टूबर को कर्जत में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर इस परियोजना को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि परियोजना की पूरी जानकारी लिए बिना और उसका अध्ययन किए बिना ही इसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पंप स्टोरेज परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं। कर्जत में पेड़ों की कटाई को लेकर जारी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंप स्टोरेज परियोजनाओं की आवश्यकता समझाई। उन्होंने कहा, ‘मैं एक बार फिर स्पष्ट कर रहा हूं कि पंप स्टोरेज परियोजना पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। फडणवीस ने बताया कि भारत में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इन दोनों स्रोतों से 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं हो सकती। शाम 5 बजे के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन नहीं होता और हवा नहीं चलने पर पवन ऊर्जा भी उपलब्ध नहीं होती है।
इससे बिजली ग्रिड पर असर पड़ता है और चौबीसों घंटे नवीनीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने, बिजली ग्रिड को स्थिर रखने और 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पंप स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पंप स्टोरेज परियोजनाओं की मदद से बिजली की अधिक मांग वाले समय में स्वच्छ और नवीनीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे प्रदूषण भी नहीं होता। केन्द्र ने पंप स्टोरेज परियोजनाओं को हरित श्रेणी में रखा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पंप स्टोरेज परियोजनाओं को हरित परियोजनाओं की श्रेणी में शामिल किया है। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं को केवल पेड़ों की कटाई के मुद्दे से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इनके बारे में उचित अध्ययन करना और उनकी कार्यप्रणाली को समझना भी आवश्यक है। फडणवीस ने कहा कि परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों के मन में जो शंकाएं और आपत्तियां हैं, सरकार उन्हें सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों के सवालों और उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।
3,000 मेगावाट की परियोजना और 28 करोड़ पेड़ों का तर्क
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कर्जत में प्रस्तावित परियोजना की क्षमता 3,000 मेगावाट है। उन्होंने दावा किया कि यदि इतनी क्षमता की बिजली कोयले से पैदा की जाए, तो उससे होने वाले प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए 28 करोड़ पेड़ लगाने पड़ेंगे। फडणवीस ने कहा, ‘अगर हम पंप स्टोरेज परियोजना का विरोध करेंगे, तो हमें कोयले से पैदा होने वाली बिजली का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा। कोयले से बिजली बनाने पर होने वाले प्रदूषण की भरपाई के लिए करोड़ों पेड़ लगाने होंगे, जो लगभग असंभव है। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोयले पर निर्भरता और उससे होने वाले प्रदूषण को कम करना है, तो इस तरह की परियोजनाओं की आवश्यकता है।













