विज्ञान, आत्मा और शरीर के बारे में ज्ञान हमारे पास था
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। देश में हर क्षेत्र में काम करने वाले लोग थे। उन्होंने कोई भी क्षेत्र नहीं छोड़ा था। शून्य की खोज नहीं हुई होती, तो दुनिया की प्रगति नहीं हुई होती। शरीर विज्ञान, आत्मा और शरीर के बारे में ज्ञान भी हमारे पास था। भारत में दो हजार साल पहले से ही महिलाएं लेखन कर रही थीं। अंग्रेज लेखिकाएं उसके बाद के दौर में आईं। इसलिए अंग्रेज हमें अक्ल न सिखाएं। हम कई चीजों को मानते हैं, हमारे पास एक ग्रंथ नहीं है, हर किसी को अपनी-अपनी माननी चाहिए, बौद्ध, सिख, आदिवासियों के अलग-अलग ग्रंथ हैं, उनका अलग हिंदुत्व है, वह भी महत्वपूर्ण है, हम सभी को मानना चाहिए, ऐसा कुछ एक नहीं है, सभी की सभी बातें माननी चाहिए तभी यह देश बड़ा होगा। देश का दुर्भाग्य यह है कि, हम वर्तमान के पीछे पड़ गए और अतीत को भूल गए। जितना हम अतीत से दूर जाएंगे, उतने ही हमारे बुरे दिन आएंगे।
पहले भारत इतना विकसित था कि, गांवों में नाई भी प्लास्टिक सर्जरी किया करते थे। होंठ बाहर निकले हों तो उन्हें ठीक करना, दांतों की बनावट सुधारना, ऐसे काम भी नाई किया करते थे, ऐसा दावा वरिष्ठ साहित्यकार भालचंद्र नेमाडे ने किया। हिंदू रिसर्च फाउंडेशन की ओर से प्रदान किया गया महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार स्वीकार करने के बाद वे बोल रहे थे। नेमाडे ने यह भी कहा कि हिंदु इस शब्द का अर्थ संकुचित और नकारात्मक हो गया है और इसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने उल्लेख किया कि अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और चीन के लोगों के साथ भी हमारा सांस्कृतिक संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों के लोगों को रामायण आदर्श लगता है। हिंदुत्व कहने पर गोधरा की याद आती है।
हालांकि हिंदुत्व का अर्थ केवल इतना ही नहीं है। सभी को अपने करीब लाने वाला और दूर के देशों को भी जोड़ने वाला हिंदुत्व है। अगली पीढ़ी को हिंदुत्व का वास्तविक अर्थ समझाने की जरूरत है। साहित्य के माध्यम से इस व्यापक विचार को स्थापित किया जाना चाहिए। फाउंडेशन के ‘सप्तर्षि पुरस्कारों’ के अंतर्गत इस वर्ष का महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार नेमाडे को प्रदान किया गया। भारत का गौरव उसकी अतीत की उपलब्धियों के कारण है। इसलिए अतीत का महत्व समझना आवश्यक है। देश का वर्तमान अच्छा नहीं होने की बात कहते हुए उस पर ध्यान देने के बजाय अतीत की अच्छी बातों को समझकर उन्हें आगे लाना चाहिए, ऐसा मत उन्होंने व्यक्त किया।














