27 अक्टूबर को दाते कॉलेज मैदान में होगा आयोजन
लोकवाहिनी संवाददाता
यवतमाल। यवतमाल की विशिष्ट खाद्य परंपरा के रूप में पहचान बना चुके ‘बुढ़ी के चिवड़े’ को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मंगलवार को आयोजित इस कार्यक्रम के लिए 15 हजार लीटर क्षमता वाली विशाल कढ़ाई यवतमाल पहुंच गई है। पालकमंत्री संजय राठौड़ ने रविवार को कढ़ाई का विधिवत पूजन किया। इसके बाद कढ़ाई को दाते कॉलेज परिसर स्थित कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। इस अवसर पर आजाद मैदान से दाते कॉलेज तक बाइक रैली भी निकाली गई। एस.एल. फाउंडेशन की पहल और शहर की विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार, अयोध्या में श्रीराम मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा समारोह के दौरान राम हलवा तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई विशाल कढ़ाई अब यवतमाल के चिवड़े के विश्व रिकॉर्ड प्रयास में उपयोग की जाएगी। शनिवार को यह कढ़ाई कोराडी से यवतमाल के लिए रवाना हुई थी। इसके साथ पांच हजार लीटर क्षमता वाली एक अन्य कढ़ाई भी लाई गई है। विशाल कढ़ाई के आगमन के साथ निकाली गई बाइक रैली कार्यक्रम की प्रमुख आकर्षण रही। इस अवसर पर पालकमंत्री संजय राठौड़ ने बुढ़ी के चिवड़े को लोकप्रिय बनाने वाली अंजनाबाई भुवाडे की स्मृति में आजाद मैदान पर खाद्य चौपाटी विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इंदौर की प्रसिद्ध खाऊ गली की तर्ज पर यवतमाल में भी खाऊ चौपाटी विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए नगर परिषद को पहल करनी चाहिए।
पालकमंत्री के रूप में उन्होंने शासन स्तर पर आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में नगर परिषद के उपाध्यक्ष दत्ता कुलकर्णी, शिवसेना के जिला संपर्क प्रमुख हरिहर लिंगनवार, श्रीधर मोहोड, जिला प्रमुख गजानन डोमाले, समन्वयक संजय हातगांवकर, संजय दंगे, महिला आघाडी प्रमुख दशर्ना झोले, लोकसभा प्रमुख विशाल गन्नावता, तालुका प्रमुख योगेश वर्मा, युवासेना प्रमुख प्रसंन्न जवलेकर, महेश पवार, पार्षद पिट्टू बांगर और महिला आघाडी की शहर प्रमुख सरला इंगले सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। उद्यमी अजय मुंदडा और रामू निकल भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस विश्व रिकॉर्ड प्रयास में नागपुर के प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ विष्णु मनोहर की महत्वपूर्ण भूमिका है। आयोजकों के अनुसार, अभिनेत्री मृणाल कुलकर्णी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगी।
यवतमाल में बुढ़ी के चिवड़े की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। दिवाली के फराल से लेकर मित्रों और रिश्तेदारों की मुलाकातों तक, यह चिवड़ा स्थानीय लोगों की खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। अब इसी पारंपरिक स्वाद को व्यापक पहचान दिलाने और यवतमाल का नाम वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह 6 से 10 बजे तक मुफ्त मिलेगा चिवड़ा
मंगलवार को सुबह 6 बजे से 10 बजे तक दाते कॉलेज मैदान में चिवड़े का मुफ्त वितरण किया जाएगा। आयोजकों ने तीन हजार किलो से अधिक चिवड़ा वितरित करने की योजना बनाई है। एस.एल. फाउंडेशन के अध्यक्ष अश्विन सक्तालाखे ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल बड़े पैमाने पर चिवड़ा तैयार करना ही नहीं, बल्कि यवतमाल की सांस्कृतिक और खाद्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा सामाजिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना भी है। आयोजकों ने नागरिकों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है। इस आयोजन के माध्यम से यवतमाल की पारंपरिक खाद्य पहचान को नई ऊंचाई देने और स्थानीय विरासत को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।














