तीन महीने तक चले चुनौतीपूर्ण अभियान में वन विभाग को सफलता
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
लोकवाहिनी संवाददाता
भंडारा। साकोली तहसील और नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में पिछले चार महीनों से दहशत का पर्याय बनी लंगड़ी बाघिन ‘टी-27’ को आखिरकार रविवार को उमरझरी क्षेत्र के जंगल से वन विभाग ने सफलतापूर्वक पकड़ लिया। तीन महीने से अधिक समय तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान के सफल होने पर पूरे क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। इस अभियान को नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व, गोंदिया एवं भंडारा वन विभाग की रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) तथा एफडीसीआईएम के वनकर्मियों ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। कई बार वन विभाग को चकमा देकर फरार हो जाने वाली इस बाघिन को पकड़ने के लिए सैकड़ों वनकर्मी, विशेषज्ञ और अधिकारी दिन-रात अभियान में जुटे हुए थे। मार्च महीने में इस बाघिन ने मात्र 19 दिनों के भीतर तीन हमले कर क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। 19 मार्च को बांपेवाड़ा निवासी वसंत मेश्राम की महुआ के फूल बीनने के दौरान बाघिन के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 27 मार्च को उमरझरी की माया सोनवणे पर हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल माया सोनवणे की नागपुर में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। वहीं आमगांव निवासी छाया मुंगमोडे भी बाघिन के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई थीं। इसके बाद 24 जून को आमगांव के हरिशचंद्र मडावी पर हमला कर बाघिन ने उन्हें भी अपना शिकार बना लिया।
■ ग्रामीणों का जनजीवन हुआ था प्रभावित
लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। किसान, मजदूर और जंगल से सटे गांवों के लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। सुबह-शाम घर से निकलने में भी लोगों को डर लगने लगा था। वन विभाग ने कई स्थानों पर पिंजरे, कैमरे, ट्रैप और विशेष टीमें तैनात की थीं, लेकिन घायल होने के बावजूद बाघिन बेहद सतर्कता से अपनी गतिविधियां बदलती रही, जिससे उसे पकड़ने में समय लगा। रविवार सुबह उमरझरी क्षेत्र के एक गन्ने के खेत में बाघिन द्वारा एक बकरी का शिकार किए जाने की सूचना वन विभाग को मिली। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए टीम ने उसे सफलतापूर्वक बेहोश कर पकड़ लिया। सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) सुहास कांबले के अनुसार, बाघिन की चिकित्सीय जांच की जा रही है तथा उसके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चार महीने से पूरे क्षेत्र में भय का कारण बनी ‘टी-27’ के पकड़े जाने से साकोली तहसील सहित आसपास के गांवों के लोगों ने आखिरकार राहत की सांस ली है।











