बच्चों की थाली में मिला फफूंद लगा भोजन : सांसद पडोले
लोकवाहिनी, संवाददाता
भंडारा। जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की जिला परिषद स्कूलों की बदहाल स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। कई स्कूलों में विद्यार्थियों के सिर पर सुरक्षित छत नहीं है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं और छत से पानी टपक रहा है। कई स्थानों पर शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन में मियाद खत्म हो चुके खाद्य पैकेट और फफूंद लगी सब्जियां मिलने का दावा किया गया है।
कांग्रेस सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि जिले की 50 प्रतिशत से अधिक जिला परिषद स्कूल जर्जर अवस्था में हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने विभिन्न स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। सांसद पडोले ने भंडारा तहसील के मोहतुद्रा, मोहाड़ी तहसील के नेरी, वडेगांव और पांढराबोडी तथा तुमसर तहसील के गायमुख और आंबागढ़ स्थित जिला परिषद स्कूलों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान कई स्कूल भवनों की हालत बेहद खराब पाए गए। उन्होंने दावा किया कि कई इमारतों की दीवारों में बड़ी दरारें हैं, जबकि कुछ स्थानों पर छत से पानी टपक रहा है। कुछ भवनों की स्थिति इतनी खराब है कि वे कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। पडोले ने सवाल उठाया कि स्कूल विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शिक्षा का केंद्र होना चाहिए, लेकिन यदि भवन ही जर्जर हों तो बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं या खतरे के बीच पढ़ रहें हैं? उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में ऐसे भवनों में विद्यार्थियों को बैठाना उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
सांसद ने प्रशासन से सवाल किया कि यदि किसी स्कूल की छत गिरती है या दीवार ढहने से किसी विद्यार्थी की जान चली जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस सवाल का जवाब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने देना चाहिए। निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन योजना में भी गंभीर लापरवाही सामने आने का दावा किया गया। पडोले के अनुसार कुछ स्थानों पर मियाद समाप्त हो चुके सीलबंद खाद्य पैकेट और फफूंद लगी सब्जियां मिलीं।
रसोईघरों की स्थिति भी खराब
मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले रसोईघरों की स्थिति भी चिंताजनक होने का दावा किया गया। भोजन की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और उसकी गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। ऐसे में नियमित निरीक्षण और जांच होती है या केवल कागजों पर रिपोर्ट तैयार की जाती है, यह सवाल भी सामने आया है। पडोले ने कहा कि यदि नियमित जांच होती है तो फफूंद लगी सब्जियां और मियाद समाप्त खाद्य सामग्री अधिकारियों की नजर से कैसे बच गईं?
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी अवव्यवस्था का आरोप
स्कूलों के साथ ही गायमुख और आंबागढ़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का भी निरीक्षण किया गया। सांसद पडोले ने यहां बड़े पैमाने पर असवच्छता और मूलभूत सुविधाओं की कमी होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
सांसद पडोले ने स्कूलों की मरम्मत के लिए उपलब्ध कराए गए धन के नियोजन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, रखरखाव और अधिकारियों की निगरानी की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही जिले की जिला परिषद स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज मंजूर करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण स्कूलों में विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन देने के बजाय यदि खराब और मियाद समाप्त खाद्य सामग्री दी जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?













