जलसंसाधन विभाग में क्या चल रहा है…. भाग – 11
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। सरकारी पैसा जनता का पैसा होता है। उसे खर्च करते समय नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन नागपुर के सिंचाई परियोजना कार्यालय के कामकाज को लेकर सामने आ रहे दस्तावेज कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। इन सवालों के जवाब देने के बजाय यदि मौन साधा जा रहा है, तो संदेह और भी गहरा होता है। शीतकालीन अधिवेशन, जलजागरूकता पखवाड़ा, खेल प्रतियोगिताएं, विभिन्न सरकारी कार्यक्रम-ऐसे कई उपक्रम बार-बार उसी कार्यालय को ही क्यों दिए जाते हैं? चयन के मानदंड क्या हैं? हर साल लाखों रुपये की नई खरीदारी क्यों करनी पड़ती है? पिछले वर्ष खरीदा गया सामान कहां जाता है? स्टॉक रजिस्टर क्या बताता है? इन सवालों के जवाब संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
कोटेशन, निविदाएं, वर्क ऑर्डर, स्टॉक रजिस्टर, मापन पुस्तिका, भुगतान, जीएसटी रिकॉर्ड, जीएसटी ई-वे बिल और वित्तीय मंजूरी की पूरी श्रृंखला जनता के सामने रखी जाए। सच छिपाने की जरूरत केवल उन्हें होती है जिन्हें कुछ छिपाना होता है। सबसे गंभीर बात कार्यालय की निरीक्षकों की है। कहा जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी हर साल जांच करते हैं। फिर सवाल यह है कि यदि सब कुछ ठीक है तो इतने संदेह कैसे पैदा हुए? और यदि कुछ गलत पाया गया था, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है- यह सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन में कोई भी अधिकारी नियमों से बड़ा नहीं होता। सरकारी निर्णय, पीडब्ल्यूडी मैनुअल, स्टोर मैनुअल और वित्तीय अनुशासन सभी के लिए समान हैं। यदि उनका पालन नहीं हुआ है, तो निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए।
अब सरकार को बिना समय गंवाए सतर्कता दल, स्वतंत्र लेखा परीक्षा प्रणाली और आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों के माध्यम से पूरे मामले की गहन जांच करनी चाहिए। संबंधित सभी दस्तावेज तुरंत सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर हर खर्च की जांच की जाए। दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई हो।
यह चेतावनी किसी व्यक्ति विशेष को नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता और लापरवाही के खिलाफ है। जनता के पैसे का हिसाब देना ही होगा। सवाल पूछने वालों को चुप कराने के बजाय सवालों के जवाब दें। क्योंकि आज का समय सूचना का है। कागज बोलते हैं, रिकॉर्ड बोलते हैं और सच अंततः सामने आ ही जाता है। सरकार को भी यह याद रखना चाहिए। निष्पक्ष जांच किसी के साथ अन्याय नहीं होती, बल्कि यह ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे प्रभावी रास्ता है। इसलिए अब निर्णय का समय आ गया है। जांच करें, सच सामने लाएं और जनता का विश्वास बनाए रखें।













