मुख्यमंत्री की घोषणा, लातुर, धाराशिव, सोलापुर जिलों के खेतों पर जाकर किया फसलों का निरीक्षण
लोकवाहिनी, संवाददाता
धाराशिव। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुधवार को मराठावाड़ा दौरे पर थे और इस दरम्यान लातुर, धाराशिव, सोलापुर जिलों के खेतों पर जाकर वे फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान, किसानों ने अपनी व्यथा सामने रखी। धाराशिव जिले में इस साल बारिश की मात्रा बेहद कम रहने से सूखे की स्थिति गंभीर हो गई है और कई इलाकों में केवल 10 से 12 प्रतिशत ही बारिश हुई है। फसलों की स्थिति बेहद खराब हो गई है और सोयाबीन की फसल हाथ से निकल गई है। वहीं गन्ने की बढ़त भी रुक गई है।
इस पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार स्थिति का उचित आकलन कर किसानों की मदद के लिए अगले दो दिनों में शासन निर्णय (जीआर) जारी करने का प्रयास करेगी, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया। धाराशिव जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जिले के दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने किसानों और स्थानीय प्रशासन से सूखे की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। अब तक का सबसे बड़ा पानी का सुखा देखने को मिल रहा है। हर साल की तुलना में इस साल बारिश बहुत ही कम हुई है। कई इलाकों में केवल 10 से 12 प्रतिशत ही बारिश होने के कारणों फसलों की स्थिति खराब है। सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है और गन्ने की बहुत भी रुक गई है। किसानों पर यह बहुत बड़ा संकट आया है, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया।
सुखे की स्थिति में कानून के अनुसार पंचनामा करना आवश्यक है, फिर भी जिले की स्थिति हर जगह गंभीर है। इसलिए किसानों को व्यापक रूप से मदद करने की सरकार की भूमिका है। अगले दो दिनों में इस संबंध में शासन निर्णय (जीआर) जारी कर किसानों को उचित मदद देने का प्रयास किया जाएगा, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया। सूखे की पृष्ठभूमि में नागरिकों को पीने का पानी और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। पीने के पानी और पशुओं के लिए चारे की पुख्ता व्यवस्था करने का सरकार का प्रयास है; साथ ही किसानों को सीधे आर्थिक मदद दी जाएगी, ऐसा फडणवीस ने बताया। सूखे के कारण नुकसान झेलने वाले किसानों को फसल बीमा की मदद दिलाने के लिए सरकार विशेष प्रयास करेगी, ऐसा भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया। नुकसानग्रस्त किसानों को सरकार की प्रत्यक्ष मदद के साथ ही, फसल बीमा के माध्यम से भी अधिक से अधिक राहत देने का प्रयास किया जाएगा। सूखे की स्थिति में किसानों से कर्ज वसूली के लिए तकादा करने वाले बैंकों को भी मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है। बैंक किसानों को कर्ज वसूली के नोटिस दे रहे हों या उनसे तकादा कर रहे हों, तो ऐसे बैंकों पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसा फडणवीस ने स्पष्ट किया। सूखे के कारण मुश्किल में फंसे किसानों को तत्काल मदद मिलना आवश्यक है और सरकार के आगामी फैसले की और धाराशिव जिले के किसानों और नागरिकों का ध्यान लगा हुआ है।
मराठावाड़ा में 35 प्रतिशत कम बारिश
पिछले डेढ़ महीने से बारिश के गायब रहने की कारण खरीफ की सभी फसलें बर्बाद हो गई हैं और सोयाबीन सूख रहा है, ऐसा किसान बता रहे हैं। इसी बीच, मराठावाड़ा में इस साल औसत की तुलना में पूरे 35 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। इसके कारण मराठावाड़ा में पानी की कमी का सवाल गंभीर रूप धारण कर रहा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने एहतियाती उपाय के तौर पर बांधों में उपलब्ध पानी को केवल पीने के लिए आरक्षित रखने का फैसला किया है, ऐसा संभागीय आयुक्त श्रीकांत ने बताया। मराठावाड़ा में सबसे अधिक 50 प्रतिशत कमी लातुर जिले में है। इसके बाद धाराशिव और बीड जिलों में 40 प्रतिशत, जबकि परभणी में 43 प्रतिशत बारिश की कमी है। छत्रपति संभाजीनगर और जालना जिलों में कुछ मात्रा में बारिश हुई है, फिर भी वहां भी करीब 26 प्रतिशत कमी बनी हुई है। बारिश के अभाव में पानी की कमी पैदा होने के कारण इस बरसात के मौसम में मराठावाड़ा में 246 टैंकर शुरू रखने पड़े हैं। इनमें सबसे अधिक 120 टैंकर बीड जिले में, 96 टैंकर छत्रपति संभाजीनगर और 22 टैंकर जालना में रेड हैं।
बांधों में कम पानी
मराठावाड़ा के 917 छोटे-बड़े प्रकल्पों में अपेक्षित जल भंडारण की तुलना में 50 प्रतिशत कमी है। जायकवाड़ी बांध में कुछ मात्रा में भंडारण होने के बावजूद, मांजरा बांध में केवल 10 प्रतिशत पानी का भंडारण बचने से स्थिति चिंताजनक बन गई है। नदियों में बहते पानी रोके जाने के लिए हर साल सितंबर में बंद किए जाने वाले बंधारे इस साल जुलाई-अगस्त महीने में ही बंद कर दिए गए हैं।
सरकार को प्राथमिक रिपोर्ट भेजेंगे
प्रशासन ने कमी योजना की तैयारी की थी। उसके अनुसार कमी के उपाय हमने पहले दिन से ही किए। क्योंकि ऐसी स्थिति होने की पूर्वकल्पना सरकार ने दी थी। इसके लिए वरिष्ठ स्तर पर बैठक हुई और हमारे स्तर से भी निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी इन सभी को नियमित रूप से फील्ड विजिट बांटना, तालुका कृषि अधिकारी फील्ड विजिट कर सूखे जैसी स्थिति तथा, फसल की स्थिति स्पष्ट है।













