श्रद्धा : शिर्डी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दो दिनों में 1 करोड़ 70 लाख रुपये का दान
मुंबई। देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का उत्साह और उत्सव मनाया जा रहा है। देशभर के विभिन्न देवस्थानों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देशभर से पालकीयां साई नगरी शिर्डी पहुंची हैं और गली से लेकर दिल्ली तक के भक्तों से शिर्डी नगरी गुलजार हो गई है। गुरु पूर्णिमा उत्सव के मुख्य दिन साई की शिर्डी भक्तों से खचाखच भर गई है और देशभार से आए श्रद्धालु साई समाधि के दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं। वहीं, गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर शिर्डी के साईबाबा समाधि मंदिर में साई भक्तों द्वारा स्वर्णदान का सिलसिला लगातार जारी है। मुंबई के एक साई भक्त ने गुप्त दान के माध्यम से लगभग 47 लाख रुपये मूल्य का, 300 ग्राम वजन का आकर्षक सोने का हार साई चरणों में अर्पित किया है। गुरु पूर्णिमा अर्थात गुरु को नमन करने का दिन।
श्री साईबाबा को गुरु स्वरूप मानने वाले लाखोंों साई भक्तों ने शिर्डी में भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई है। साईबाबा संस्थान की ओर से भी भक्तों की भेंट से साई मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है और मंदिर तथा परिसर की विद्युत रोशनी ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। विद्युत सजावट और सुंदर पुष्प सज्जा की गई है। वहीं, श्रद्धालुओं की भीड़ से साई नगरी पूरी तरह से जगमगा उठी है। भक्त साई चरणों में दान अर्पित कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से साई चरणों में भरपूर दान अर्पित किया जा रहा है। साईबाबा को लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये का स्वर्णदान प्राप्त हुआ है। मुंबई के एक साई भक्त ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए लगभग 47 लाख रुपये मूल्य का 300 ग्राम वजन का सोना का हार आज साई चरणों में अर्पित किया। अत्यंत आकर्षक डिजाइन और सुंदर नक्काशी वाले इस स्वर्णहार को विधिवत संस्थान को सौंपा गया है, ऐसी जानकारी श्री साईबाबा संस्थान के सीईओ गोरक्ष गाडीलकर ने दी। गुरु पूर्णिमा के दो दिनों में साई भक्तों द्वारा स्वर्णदान का रिकॉर्ड स्तर पर प्रवाह देखने को मिला है। कल 642 ग्राम वजन का, 1 करोड़ 3 लाख रुपये मूल्य का सोने का मुकुट भी साई चरणों में अर्पित किया गया था। इसके बाद अब इस 300 ग्राम के स्वर्णहार के जुड़ने से केवल दो दिनों में लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये का स्वर्णदान साईबाबा के चरणों में अर्पित किया गया है।
पंढरपुर में भी गुरु पूर्णिमा का उत्साह
आषाढ़ी यात्रा के लिए सैकड़ों मील पैदल चलकर आई पालकी यात्रा की पादुकाओं का बुधवार को भगवान के चरणों से मिलन हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भगवान और संतों के इस अनुपम मिलन को देखने के लिए पालकी यात्रा में शामिल सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में भारी भीड़ लगाई। आषाढ़ी के लिए आई संतों की पादुकाएँ विठ्ठल मंदिर में जाती हैं या नहीं, इसे लेकर दुनियाभर के विठ्ठल भक्तों में उत्सुकता रहती है। आषाढ़ी समारोह के लिए आई संतों की पादुकाओं का सीधे विठ्ठल भगवान के चरणों से मिलन होता है।












