सभी मंत्री-विधायक क्षेत्रों का दौरा करेंगे, तीन दिन में पहली अधिसूचना जारी करेंगे : फडणवीस
मुंबई। राज्य में पिछले डेढ़ महीने से बारिश ने दगा देने से किसान बेहाल हो गया है। खेतों में खरीफ फसलों का भारी नुकसान हुआ है और सोयाबीन सूख गया है। मराठवाड़ा के किसानों का सबसे अधिक नुकसान होने की बात प्रथमदृष्ट्या दिखाई देती है। इसी पृष्ठभूमि में किसानों की ओर से नुकसान भरपाई घोषित करने की मांग की जा रही है। राज्य में सूखा घोषित किया जाए ऐसी मांग विपक्ष की ओर से की जा रही है। वहीं, विभिन्न किसान संगठन भी सड़कों पर उतर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में आज मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया को जानकारी दी। किसानों की खेती के नुकसान के संबंध में आज से पंचनामा करने के आदेश दिए हैं, इसके लिए क्षेत्रों का दौरा करके जानकारी एकत्र की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुंबई में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से कहा, सिर्फ सूखा घोषित करना पर्याप्त नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सूखा प्रबंधन से जुड़े उपाय लागू किए जाएं। पहली अधिसूचना तीन दिन में जारी की जाएगी।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों, खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ में कमजोर मानसून के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। अधिकांश क्षेत्रों में फसलें झुलस गई हैं। सोयाबीन और कपास की फसलों पर सबसे अधिक असर हुआ है, कोंकण में धान पर असर हुआ है, ऐसा कहते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंचनामा बनाने के आदेश दिए जाने की जानकारी दी। विशेष रूप से पीने का पानी और पशुओं के चारे पर ध्यान देने का तय किया गया है। महानगरपालिका, नगरपालिका और पंचायत राज संस्थाओं को पीने के पानी के संबंध में निर्णय लेने के अधिकार दिए गए हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में समिति नियुक्त की गई है।
केंद्र से आर्थिक मदद मांगेंगे
हम केंद्र से आर्थिक मदद मांगेंगे। इसके लिए अलग प्रस्ताव देंगे। एनडीआरएफ के नियम के अनुसार प्रस्ताव देंगे। पिछली सूखा और बेमौसम की स्थिति में केंद्र की मदद का इंतजार नहीं किया था। केंद्र की मदद देर से मिलती है। इसलिए हमारा प्रस्ताव जाएगा। कानून के प्रावधान पूरे करके प्रस्ताव भेजेंगे। लेकिन मदद आने तक हम नहीं रुकेंगे। हम पहले ही किसानों के लिए मदद घोषित करेंगे, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया।
इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। मन में आए आंकड़े बताने का काम शुरू है। इससे पहले जब सूखा पड़ा था तब क्या मदद मिली? उनकी सरकार के समय क्या मदद मिली? तब मदद देने की क्या प्रक्रिया थी? क्या इससे अलग प्रक्रिया थी? कुछ मांगें रखते समय विपक्ष को वास्तविकता का ध्यान रखना चाहिए। केवल प्रचार के लिए मांग करना उचित नहीं है, ऐसा तंज उन्होंने कसा।













