एम्बुलेंस को डीजल नहीं मिला- यह कहना गलत है, हम कार्रवाई करेंगे : स्वास्थ्य मंत्री
लोकवाणी, संवाददाता:हिंगोली। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरें आ रही है। वहीं हिंगोली में ईंधन संकट के कारण एक क्रूर और अमानवीय पहलू उजागर कर हुआ है। औंढ़ा नागनाथ तालुका के जार बाजार इलाके में रहने वाले एक गरीब परिवार की महिला को तत्काल बड़े अस्पताल में स्थानांतरित करने की जरूरत थी, तब सरकारी तंत्र ईंधन की अनुपलब्धता के रोना रो रहा था। अस्पताल पहुंचानें में हुए विलंब के कारण जब महिला को हिंगोली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो वहां के डॉक्टरों ने जो कहा, उसने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को महज आधा या एक घंटा पहले लाया जाता, तो शिशु को सुरक्षित बचाया जा सकता था। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इस तरह का गुस्सा भी जाहिर किया जा रहा है। वहीं इस घटना से प्रशासन की नींद उड़ गई है। इस घटना पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर ने कहा है कि यह कहना गलत है कि डीजल उपलब्ध नहीं होने के कारण एम्बुलेंस को अस्वीकार कर दिया गया था और इस मामले की जांच की जाएगी। वह मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बातचीत की। अगर ऐसा हुआ है तो हम इसकी जांच कराएंगे। यह कहना गलत होगा कि डीजल नहीं मिलने से इलाज नहीं हुआ। इस मामले में तथ्यों को देख कर कार्रवाई करेंगे। क्योंकि एम्बुलेंस के लिए डीजल के लिए राशि का प्रावधान है। इसके लिए मैनपावर है। यदि हमने जो उचित बुनियादी ढांचा बनाया है, उसका समाज द्वारा उचित उपयोग नहीं किया जाता है, तो जांच का आदेश दिया जाएगा। प्रकाश अबिटकर ने कहा कि जो गलत चीजें हुई हैं हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
वहीं पीड़ित महिला के रोते-बिलखते रिश्तेदारों ने मीडिया के सामने स्वास्थ्य केंद्र की संवेदनहीनता की पूरी कहानी बयां की। उन्होंने बताया, हमारी मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तुरंत हिंगोली ले जाना जरूरी था। जब एम्बुलेंस चालक और डॉक्टरों ने डीजल न होने की बात कही, तो हमने समय गंवाने के बजाय खुद अपनी जेब से 850 का डीजल गाड़ी में भरवाया और उसे जैसे-तैसे यहां लेकर आए। लेकिन जब हम हिंगोली अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टर ने कहा कि बहुत देर हो चुकी है, अगर आप थोड़ा पहले आ जाते तो आपकी बच्ची जिंदा होती। हिंगोली जिले सहित पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र के नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ईंधन की कमी से अब तक केवल परिवहन और खेती का काम प्रभावित हो रहा था, लेकिन अब यह लोगों की जान पर बन आई है। पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी डॉक्टरों और एम्बुलेंस के लिए ईंधन की व्यवस्था न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला कलेक्ट्रेट के सामने उग्र प्रदर्शन करेंगे।
इस हत्या के लिए सरकार जिम्मेदार : रोहिणी खडसे
इस घटना पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार पार्टी की महिला प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खडसे ने गुस्सा जताया है। इस बारे में रोहिणी खडसे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस, खाद्य मंत्री छगन भुजबल और सत्ता पक्ष के नेता कहते हैं कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है, ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। लेकिन एक बच्चे की जान चली गई। उन्होंने इसे प्राकृतिक मौत मानने से इनकार करते हुए सीधे तौर पर सरकारी हत्या करार दिया है। रोहिणी खडसे ने कहा, एक तरफ ईंधन किल्लत पर सरकार और उसके मंत्री लगातार यह दावा करते हैं कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ हिंगोली में सिर्फ इसलिए एक मां को अपना बच्चा खोना पड़ता है क्योंकि एम्बुलेंस को डीजल नहीं मिला।












