इस त्योहारी सीजन में मिठाई, बिस्किट और चॉकलेट खरीदते समय कंज्यूमर्स की जेब पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ने की संभावना है। सितंबर में चीनी का एवरेज रिटेल प्राइस करीब 62 रुपये प्रति kg तक पहुंच गया है। जुन में यही प्राइस 47 रुपये प्रति kg था। यानी कुछ ही महीनों में चीनी के प्राइस में भारी बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों के पास आते ही घरों में मिठाइयों और मीठी चीजों की डिमांड बढ़ जाती है। त्योहारों की तैयारी में महिलाओं के लिए मिठाई, स्नैक्स और घर में बनी चीजें खास मायने रखती हैं। इसलिए, चीनी के बढ़ते प्राइस का असर उनके महीने के साथ-साथ त्योहारों के बजट पर भी पड़ सकता है। मिठाई बेचने वालों और फूड मैन्युफैक्चरर्स को भी प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है।
प्राइस में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण चीनी की अवेलेबिलिटी में कमी और त्योहारों से पहले बढ़ती डिमांड है। 2025-26 सीजन के लिए चीनी प्रोडक्शन का अनुमान करीब 3 करोड़ 6 लाख टन लगाया गया था। शुरुआती अनुमान 3 करोड़ 43 लाख टन था। इस वजह से मार्केट में मौजूद स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ गई है। जुलाई के आखिर और अगस्त में चीनी के रिटेल प्राइस में बढ़ोतरी इसी प्रेशर का इशारा थी। हालांकि अब प्राइस कुछ हद तक कम हो गया है, लेकिन फूड मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की कॉस्ट पर इसका असर तुरंत कम नहीं हुआ है।
इसलिए, कंज्यूमर्स को अपनी फेस्टिव शॉपिंग प्लान करते समय अपने खर्चों का पहले से अंदाजा लगाना होगा। घर पर मिठाई बनाने वाली महिलाओं को भी चीनी, दूध, घी और दूसरी चीजों के प्राइस को ध्यान में रखकर बजट बनाना होगा।
बढ़े हुए कॉस्ट का असर कंज्यूमर्स तक पहुंचने लगा है। बिकाजी फूड्स ने अपनी मिठाइयों के प्राइस में करीब 2 परसेंट की बढ़ोतरी की है। प्रोडक्ट्स के रिटेल प्राइस बढ़ाने के साथ-साथ कंपनियां पैकेट का वेट कम करने का ऑप्शन भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इसका मतलब है कि कंज्यूमर्स के लिए प्राइस वही रहने पर भी पहले से कम प्रोडक्ट मिलने की संभावना है।
इस बीच, चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने बड़े कंज्यूमर्स के लिए स्टॉक लिमिट 15 दिन रखी है। साथ ही, 15 सितंबर से 30 नवंबर तक व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट 4,000 क्विंटल से घटकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है। इन उपायों से बाजार में दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है।












