ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई मुद्दों पर जयशंकर और रूबियो के बीच वार्ता
लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चल रही तल्खी और कड़वाहट को दूर करने के लिए दोनों देशों ने एक बड़ी कूटनीतिक पहल की है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच नई दिल्ली में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इसके बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान ईरान युद्ध, होर्मुज, रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, आतंकवाद, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई।
जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। इसलिए ऊर्जा की उपलब्धता और सस्ती कीमत भारत के लिए बहुत जरूरी है। इसी वजह से अमेरिका के साथ ऊर्जा संकट और तेल सप्लाई को लेकर विस्तार से बातचीत की गई। बैठक में सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का स्वागत किया। जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। अमेरिकी टीम जल्द भारत आएगी ताकि ट्रेड डील के अंतिम मसौदे पर काम पूरा किया जा सके। जयशंकर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के सामने आतंकवाद जैसी साझा चुनौती है। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं।
भारत-यूएस अहम रणनीतिक साझेदार: रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका लगभग सभी बड़े वैश्विक मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं। रूबियो ने कहा कि दोनों देश ड्रग तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ भी साथ मिलकर काम करेंगे। रूबियो ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अहम जलमार्गों को कोई बंधक नहीं बना सकता। होर्मुज स्ट्रेट का मामला भी भारत और अमेरिका दोनों के हितों से जुड़ा है।
वैध आवागमन पर असर नहीं पड़ना चाहिए: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से वीजा और आव्रजन नीतियों में किए गए बदलावों को लेकर रविवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो को भारत की चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि इस नीतिगत बदलाव से वैध आवागमन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। रूबियो ने माना कि अमेरिका द्वारा आव्रजन प्रणाली में सुधार करने के प्रयासों के दौरान संक्रमण काल में कुछ अड़चनें और टकराव के बिंदु आ सकते हैं, लेकिन अंततः एक कुशल ढांचा सभी हितधारकों के लिए मददगार होगा। रूबियो के भारत आगमन से पहले, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा ने एक निर्देश जारी किया था, जिसमें ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के इच्छुक विदेशियों को आवेदन करने के लिए अपने मूल देशों में वापस जाने की आवश्यकता बताई गई थी। एजेंसी ने बाद में अपने रुख में नरमी बरती, लेकिन कुल मिलाकर इस कदम से भारतीय पेशेवरों के एक बड़े वर्ग पर असर पड़ने की संभावना है। जयशंकर ने रूबियो के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ये टिप्पणियां कीं।
दोनों नेताओं ने व्यापक वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया। पिछले साल में व्यापार और शुल्क (टैरिफ) पर वाशिंगटन की नीतियों के कारण द्विपक्षीय संबंध तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा, भारत-अमेरिका संबंधों का मूल आधार दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध है। मैंने विदेश मंत्री रूबियो को वीजा जारी करने के संबंध में वैध यात्रियों के सामने पेश आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा, हालांकि, हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हमारी अपेक्षा है कि इसके परिणामस्वरूप वैध आवागमन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एच1बी वीजा पर अमेरिकी नीति ने बड़ी संख्या में भारतीयों को प्रभावित किया है, क्योंकि इसके तहत आवेदकों के लिए लौटकर अपने गृह देश से आवेदन करना आवश्यक है।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जल्द आ सकते भारत: रूबियो
रूबियो ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका का व्यापार संतुलन सुधारने का प्रयास सिर्फ भारत को लेकर नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर व्यापार असंतुलन को ठीक करना है। उन्होंने कहा, यह भारत के खिलाफ नहीं है। दुनिया के कई देशों के साथ अमेरिका के व्यापार में असंतुलन है और उसे ठीक करने की जरूरत है। रूबियो ने उम्मीद जताई कि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जल्द भारत आ सकते हैं ताकि समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके। रूबियो ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन के अंत तक भारत-अमेरिका संबंध पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि यही अमेरिका का लक्ष्य है।









