शिंदे के बंगले पर चर्चा के बाद बड़ी राजनीतिक हलचल
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। ऐसी चर्चा है कि शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता जयंतराव पाटिल राज्य के नए वित्त मंत्री बन सकते हैं। पिछले दस दिनों से राज्य की राजनीति में अंदरूनी हलचल दिखाई दे रही थी। जयंतराव पाटिल और विनोद तावड़े की मुलाकात, उसके बाद वरिष्ठ नेता शरद पवार के साथ एकनाथ शिंदे की मुलाकात, जयंतराव के साथ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की वर्षा निवास पर बैठकें, और अंत में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात—इन घटनाओं की श्रृंखला नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही थी। माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे के बाद जयंतराव पाटिल के लिए वित्त मंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस नई राजनीतिक हलचल से भाजपा ने एक ही चाल में कितने राजनीतिक दांव खेले और कितने समीकरण बदले, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा। इसे दोनों राष्ट्रवादी गुटों के एक साथ आने की शुरुआत भी माना जा रहा है। वहीं, संसद में लंबित महत्वाकांक्षी विधयों को पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन भी जुटा लिया गया है, ऐसी भी चर्चा है। अचानक महायुति में शामिल होने को महाविकास आघाड़ी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुलाकातों के दौर से गरमाई राजनीति
पिछले दस दिनों से शरद पवार और अजितदादा की राष्ट्रवादी, साथ ही भाजपा और शिवसेना के साथ उनकी नजदीकियों की चर्चा लगातार सामने आती रही। इससे कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। वित्त विभाग को सक्षम तरीके से संभालने वाले नेता की तलाश नहीं थी, क्योंकि चेहरा पहले से सामने था। लेकिन विचारधारात्मक बाधा थी। सूत्रों के अनुसार, इस बाधा को दूर करने के प्रयास चल रहे थे। इसी क्रम में दोनों राष्ट्रवादी गुटों के विलय की चर्चा को फिर से हवा मिली। राजनीति में ‘अगर-मगर’ का महत्व होता है। राजनीतिक अस्पृश्यता जैसी कोई चीज नहीं होती।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री से बातचीत
जयंतराव पाटिल और भाजपा नेता विनोद तावड़े की मुंबई के एक पंचतारा होटल में मुलाकात होने की खबर सामने आई थी। जयंतराव पाटिल ने भी इसकी पुष्टि की थी। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि वे ईश्वरपुर के नगाध्यक्ष को अचानक पद से हटाए जाने के मुद्दे पर वर्षा निवास गए थे। लेकिन वहां सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे, ऐसी जानकारी सामने आई। हालांकि, सभी नेताओं ने एक साथ बैठक होने की खबर का खंडन किया है। इसके बाद जयंत पाटिल ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। बताया जाता है कि शिंदे की यह भावना थी कि यदि राष्ट्रवादी को वित्त विभाग दिया गया तो निधि वितरण में अन्याय हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात के बाद जयंतराव पाटिल को वित्त विभाग देने को लेकर चल रहा गतिरोध दूर हो गया। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
वित्त विभाग को लेकर घमासान के बीच एकनाथ शिंदे का दिल्ली दौरा रद्द
राज्य में वित्त विभाग को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद जारी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का अजित पवार गुट वित्त विभाग की मांग पर अड़ा हुआ है। इस संबंध में वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने वाले हैं। हालांकि, जानकारी मिल रही है कि एकनाथ शिंदे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को वित्त विभाग दिए जाने के विरोध में हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली में अमित शाह के साथ हुई बैठक में उन्होंने वित्त विभाग देने का विरोध किया था। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त विभाग अपने पास ही रखा। लेकिन जयंत पाटिल द्वारा मुख्यमंत्री से मुलाकात और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के एनडीए में शामिल होने की चर्चा के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि वित्त विभाग शरद पवार के दल को दिया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर महायुति में राजनीतिक टकराव जारी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता और सुनेत्रा पवार भी इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मिलने वाले हैं।
इसी बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दिल्ली दौरा प्रस्तावित था, लेकिन उनका यह दौरा अचानक रद्द कर दिया गया। सुबह 11 बजे वे महाराष्ट्र सदन के एक कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल होंगे। उनका दिल्ली दौरा क्यों रद्द हुआ, इसकी कोई जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वे दो दिन के दिल्ली दौरे पर जाने वाले थे। कल एकनाथ शिंदे से जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने मुलाकात की। इसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिली। हालांकि, इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। जानकारी मिल रही है कि आज एकनाथ शिंदे नंदनवन में महायुति के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। वित्त विभाग के मुद्दे की पृष्ठभूमि में इस बैठक को अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शरद पवार का दल एनडीए के साथ जा सकता है, ऐसी चर्चाएं भी तेज हैं। इसी कारण राजनीतिक मुलाकातों का सिलसिला भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, अजित पवार गुट भी वित्त विभाग की मांग पर कायम है।













