रमन साइंस सेंटर स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा दायित्व है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में राष्ट्रहित से बड़ी कोई चीज नहीं हो सकती। यदि हम किसी भी माध्यम से राष्ट्रहित में योगदान दे सकते हैं, तो यह हमारा कर्तव्य है। उक्त विचार पद्मश्री सत्यनारायण नुवाल ने व्यक्त किया। वे पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया, नागपुर चैप्टर एवं हिंदी पत्रकार संघ के संयुक्त तत्वावधान में प्रथम हिंदी अखबार उदंत मार्तंड के प्रकाशन के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रमन साइंस सेंटर स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह के आयोजन में बोल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि सफलता और नैतिकता का संतुलन आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि जीवन में कभी सफलता और नैतिकता में से किसी एक को चुनने की स्थिति आए, तो हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष पद्मश्री सत्यनारायण नुवाल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे, वरिष्ठ पत्रकार विजय फणशीकर, श्रीपाद अपराजित एवं एस.पी. सिंह शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई तथा वरिष्ठ शायर बशीर बद्र को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मनीष सोनी ने प्रस्तावना रखी। दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नागपुर में भाषा कभी विवाद का विषय नहीं रही, बल्कि संवाद का माध्यम रही है। उन्होंने 2008 के मुंबई के एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नागपुर ने हिंदी भाषियों को अपनापन दिया था। नागपुर की विशेषता यह है कि यहां लोग बिना झिझक गलत हिंदी और गलत मराठी दोनों भाषाओं का उपयोग करते हैं। यहां हर व्यक्ति स्वाभिमान के साथ अपनी भाषा बोलता है, क्योंकि भाषा यहां केवल संवाद का माध्यम है।
प्रो. कुमुद शर्मा ने उदंत मार्तंड के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भले ही उसका प्रकाशनकाल छोटा रहा, लेकिन उसने भारतीय पत्रकारिता को दिशा दी। नागपुर अब उन्हें अपना सा लगने लगा है। उन्होंने हिंदी और मराठी के गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों भाषाओं का मूल भाव एक ही है। कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले वरिष्ठों का सम्मान किया गया, जिसमें दैनिक भास्कर के समन्वय संपादक आनंद निर्बाण, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रमोहन द्विवेदी, एस.एन. विनोद, नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव, महेश पुरोहित, राजेश्वर मिश्रा, कृष्ण नागपाल, अतुल कोटचा, सुदर्शन चक्रधर, अमित वाजपेयी, मनीष सोनी, पूर्णिमा पाटिल और राजेश सिंह शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन सुमन श्रुतिका ने किया और आनंद निर्बाण ने आभार प्रदर्शन किया।












