मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताया विश्वास
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। कौशल्य, पूंजी और प्रौद्योगिकी का संयोजन करने वाले ठोस निवेश के लिए महाराष्ट्र में एक उत्कृष्ट पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। महाराष्ट्र सभी क्षेत्रों के उद्योगों में निवेश के लिए सबसे आगे है, यह बताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यूनाइटेड किंगडम के संस्थानों और उद्यमियों को महाराष्ट्र में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। इन्वेस्ट महाराष्ट्र मंच के माध्यम से, निवेश करने वालों के प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ तत्काल समन्वय स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यूके के सचिव, महापौर और अधिकारियों की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि दोनों देशों की महत्वाकांक्षाओं को वास्तविक व्यवसाय और समझौतों में बदलने का प्रयास है। महाराष्ट्र-यूके भागीदारी का शुभारंभ कार्यक्रम होटल ताज पैलेस में आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस ने संबोधित किया। इस दौरान, राज्य के मंत्री जयकुमार रावल, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव पी. अनबलगन, मुख्य सचिव राजेश गव्हाड़े और मुख्यमंत्री के सलाहकार कौस्तुभ धवले, साथ ही यूनाइटेड किंगडम के व्यवसाय, नवाचार, विज्ञान और व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स भी उपस्थित थे। यूके के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई द्विपक्षीय चर्चा के बाद, महाराष्ट्र और यूके के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के एक सामंजस्यपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, मुंबई, अंतरराष्ट्रीय वित्त, व्यापार और उद्यमिता को विश्व बाजारों से सीधे जोड़ता है। पुणे, इंजीनियरिंग, वाहन उद्योग, उत्पादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बन गया है। राज्य में उपलब्ध कुशल श्रमशक्ति, सक्षम औद्योगिक समूह एवं विश्व स्तरीय ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने वाले अनुभवी भागीदार, महाराष्ट्र की ताकत हैं। नई राष्ट्रीय शैक्षणिक नीति के कारण, विदेशी विश्वविद्यालयों को महाराष्ट्र में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति मिल गई है।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम एवं यूनिवर्सिटी ऑफ़ एबरडीन जैसे विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय महाराष्ट्र में अपने कैंपस स्थापित कर रहे हैं। राज्य में स्थापित होने वाले एयूसिटी, मेडिसिटी एवं एआई इनोवेशन सिटी के कारण, विश्व स्तरीय अनुसंधान, संस्थाएं एवं प्रतिभाएं यहाँ एकत्र होंगी। महाराष्ट्र में औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कम करना, ऊर्जा दक्षता, जल प्रबंधन, परिवहन और संसाधन पुनः उपयोग जैसे स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बहुत अवसर हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार वैश्विक कंपनियों को अपनी ग्लोबल क्षमता केंद्र और प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र महाराष्ट्र में स्थापित करने में पूरी सहायता करेगी। इस साझेदारी से, महाराष्ट्र के स्थानीय उत्पादक, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, प्रौद्योगिकी कंपनियां और लघु व्यवसाय, ब्रिटेन में नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में, महाराष्ट्र और ब्रिटेन के बीच संबंध केवल व्यापार और वाणिज्य तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि प्रत्यक्ष उद्योग, व्यवसाय और रोजगार सृजन के माध्यम से और अधिक मजबूत होंगे।
राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि यदि यूके की कंपनियां भारतीय बाजार में प्रवेश करना चाहतीं हैं, तो महाराष्ट्र उनके लिए सबसे स्वाभाविक और उपयुक्त स्थान है। इस राज्य का चुनाव इस समृद्ध आर्थिक ताकत, राजनीतिक स्थिरता और नेतृत्व के कारण किया गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था, यूरोप के नौवें देश से भी अधिक मजबूत है। यहां केवल कागजी कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हमें वास्तविक परिणाम और सफलता चाहिए। दोनों पक्षों के लोगों को मिलकर इस काम को आगे बढ़ाना चाहिए और दोनों देशों के विकास को गति देनी चाहिए। इस कार्यक्रम में यूके के स्कॉटलैंड के पर्यावरण, खाद्य और ग्रामीण मामलों के सचिव डेम एंजूला ईगल, राज्य सचिव डग्लास अलेक्जेंडर, यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के निर्देशक सोफी ब्राइस, दक्षिण एशिया के लिए यूके के उप-व्यापार आयुक्त हरशबीर शर्घा, इंग्लैंड के दक्षिण एशिया के व्यापार आयुक्त और पश्चिम भारत के लिए यूके के उप-उच्चयुक्त हरजिंदर कांग, और महापौर भी उपस्थित थे।
वेस्ट-टू-सीबीजी प्रोजेक्ट्स के लिए टास्क फोर्स बनाएंगे
महाराष्ट्र सरकार शहरों को कचरामुक्त करने के साथ-साथ कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए परियोजनाएं स्थापित करने के संबंध में एक टास्क फोर्स स्थापित करने का प्रस्ताव रखती है। जहां संभव हो, वहां राज्य की कंप्रेस्ड बायो गैस नीति के अनुसार, इन परियोजनाओं को स्थापित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विषय पर चर्चा करते हुए वर्षा निवास स्थान में आयोजित बैठक में प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में राज्य मंत्री माधुरी मिसल, मुंबई महापालिका आयुक्त अश्विनी भिंडे और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ए.वी. गोविलकर भी उपस्थित थे। केवा ग्रीन की कार्यकारी निदेशक वृंदा ठाकुर, प्रबंध निदेशक केदार वड्ढो और नंदन वड्ढो ने केवा ग्रीन की ओर से नागपुर में संचालित किए जा रहे कचरे से बायोगैस उत्पादन परियोजना के बारे में जानकारी दी। साथ ही, राज्य में ऐसी परियोजनाओं को लागू करने संबंधी जानकारी भी दी।
इस दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कचरे की मात्रा, उपलब्ध स्थान, प्रौद्योगिकी का उपयोग और गैस पाइपलाइन की दूरी को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं की योजना बनाना आवश्यक है। इसके साथ ही इस क्षेत्र की कंपनियों, तेल कंपनियों और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के सहयोग से कार्यान्वयन प्रक्रिया में निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से महापालिकाओं कचरा उठाने में लगने वाले खर्च को कम कर पाएंगे, जिससे कचरामुक्त शहर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने उल्लेख किया कि मुंबई महानगर क्षेत्र में कचरे की समस्या बहुत अधिक है इसलिए बृहन्मुंबई महापालिका, वसई-विरार, मीरा भाईंदर, कल्याण डोंबिवली और पुणे के हिंजवड़ी और चाकण क्षेत्र में इसी तरह के प्रोजेक्ट स्थापित करने पर विचार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के शहरों को कचरा मुक्त करने के लिए, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, उपलब्ध प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग, और परियोजनाओं के लिए आवश्यक स्थान की योजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक में, नागपुर में चल रहे प्रोजेक्ट का अनुभव, क्लस्टर के माध्यम से प्रोजेक्ट का निर्माण, कचरे का पृथक्करण, भूमि की उपलब्धता, गैस पाइपलाइन से जुड़ने और विभिन्न तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में उत्पन्न कचरे के लिए, आसपास के हादसों को शामिल करने वाले क्लस्टर मॉडल पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, शहरों में कचरे का प्राथमिक वर्गीकरण करके और फिर अन्य उपयुक्त स्थानों पर आगे की प्रक्रिया करने से शहर में जगह पर दबाव कम किया जा सकता है।












