ओबीसी विभाग को तुरंत मिले बजट का मंजूर फंड
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। ओबीसी के लिए बजट में मंजूर राशि वित्त विभाग द्वारा तत्काल ओबीसी विभाग को उपलब्ध कराई जाए। इसमें देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह निर्देश ओबीसी मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि निधि उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान होने के बावजूद अधिकारी मामले को टाल रहे हैं। मंत्री छगन भुजबल, गुलाबराव पाटिल और संजय राठौड़ ने भी फंड में देरी पर नाराजगी जताई है। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को मुंबई मंत्रालय में बावनकुले की अध्यक्षता में हुई उपसमिति की बैठक में ओबीसी से जुड़े 13 से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बावनकुले ने बताया कि ओबीसी महामंडलों के फंड से जुड़े मामलों को दिसंबर तक निपटाने का निर्णय लिया गया है। ‘महाज्योति’ समेत सभी महामंडलों को फिलहाल 300-300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। हालांकि महाज्योति ने 1,000 करोड़ रुपये की मांग की है। फंड की कमी के कारण कुछ कोर्स बंद होने की जानकारी सामने आने पर अधिकारियों
से 300 करोड़ रुपये कम पड़ने के कारणों की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। महाज्योति की 125 करोड़ रुपये की लंबित बिलों को तत्काल वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए। पीएचडी फेलोशिप की 126 करोड़ रुपये की देनदारी दिसंबर तक उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ है। वहीं, बार्टी को 300 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव राज्य नियोजन समिति को भेजा जाएगा।
36 ओबीसी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने पर चर्चा
बैठक में 36 ओबीसी जातियों को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने, विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की जगह उपलब्ध कराने और रोजगार व प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यूपीएससी और एमपीएससी प्रशिक्षणार्थियों की सीटें बढ़ाने की मांग रखी गई है। आश्रमशालाओं की सुविधाओं के लिए पिछले वर्ष के 48 करोड़ रुपये के लंबित बिलों के साथ 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग पर भी चर्चा हुई। विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने और आईटी सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय भी लिया गया।













