भूमि विवाद के साये में धार्मिक आयोजन पर रोक
आयोजकों ने लगाया प्रशासन को गुमराह करने का आरोप
नागपुर के काटोल रोड स्थित बोरनाला हनुमान मंदिर में आयोजित होने वाले महाप्रसाद कार्यक्रम की प्रशासन द्वारा अनुमति रद्द किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम के आयोजकों ने आरोप लगाया है कि कुछ स्वयंभू समाजसेवकों ने प्रशासन को गलत जानकारी देकर अनुमति निरस्त कराने में भूमिका निभाई। आयोजकों का कहना है कि महाप्रसाद कार्यक्रम के लिए पुलिस, यातायात विभाग और नगर निगम सहित संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
प्रशासन की ओर से अनुमति रद्द करने के पीछे संबंधित क्षेत्र में भूमि विवाद तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका को कारण बताया गया है। प्रशासन का मानना था कि कार्यक्रम के आयोजन से विवाद बढ़ सकता है और शांति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर महाप्रसाद कार्यक्रम और प्रचार बैनर लगाने की अनुमति निरस्त कर दी गई।
हालांकि आयोजकों का दावा है कि जिन व्यक्तियों के नाम का उल्लेख कर अनुमति रद्द की गई, उन्होंने स्वयं सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि मंदिर से उनकी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है और मंदिर से संबंधित मामला तथा भूमि विवाद पूरी तरह अलग-अलग विषय हैं। आयोजकों का कहना है कि मंदिर से जुड़े कुछ लोगों और तथाकथित समाजसेवकों ने निजी हितों के चलते कार्यक्रम का विरोध किया।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता बताते हुए अपना निर्णय बरकरार रखा है, जबकि आयोजक इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।












