दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने में नेल्सन मंडेला की मदद की
ओस्लो। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनेथम नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार देने की शुक्रवार को घोषणा की गई। संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय अदालत की न्यायाधीश पिल्लई को यह पुरस्कार शांति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रदान करने की घोषणा की गई है। तेईस सितंबर, 1941 को डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर जन्मी पिल्लई का बचपन रंगभेद के दौर में बीता। उन्होंने आगे चलकर रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने तथा मानवाधिकारों और समानता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपना करियर बनाया।
यह 1967 में दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला बनीं। बाद में वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चयुक्त भी रहीं। नोबेल समिति ने ओस्लो में घोषणा की कि शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों के वास्ते दक्षिण अफ्रीका की पूर्व विधिवेत्ता को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जा रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार की 125वीं वर्षगांठ है। पिल्लई को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपये है।
ट्रम्प पर तंज : आप और तालियां बजाओगे, तो शायद यह पुरस्कार बांट दूं
जर्मनी के नूर्नबर्ग में एक कानूनी सम्मेलन में भाग लेने के दौरान जैसे ही पिल्लई को नोबेल पुरस्कार जीतने की खबर मिली, वहां मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में पिल्लई ने कहा, ‘अगर आप थोड़ी और ताली बजाएंगे तो हो सकता है मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ साझा करूं।’ वीडियो में पिल्लई को नूर्नबर्ग में तालियां बजाते हुए दिखाया गया है। पिल्लई ने शुरुआती सूचना को मजाक समझे जाने पर कहा, ‘जब क्रिस्टीक ने मुझे डेस्क से बुलाकर बताया कि मैंने नोबेल शांति पुरस्कार जीता है, तो मुझे लगा कि यह निश्चित रूप से कोई मजाक है। आपके द्वारा दी जा रही ये तालियां मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं, लेकिन एक वकील और जज होने के नाते मैं अभी भी इस खबर को पूरी तरह सत्यापित करना चाहती हूं।’ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत की न्यायाधीश और 2008 से 2014 तक
दादा भारत से मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे
नवनेथम नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है। उनके दादा 1890 के दशक में भारत से बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां वे चीनी के बागानों में काम करते थे। नवी पिल्लई ने डरबन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की।













