ठेकेदारों का 96 हजार करोड़ रुपये बकाया, सरकार ने मांगी जानकारी
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। ठेकेदारों के करोड़ों रुपयों के भुगतान अटके हुए हैं। इसके कारण विदर्भ क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राज्य के ठेकेदारों के लगभग 96 हजार करोड़ रुपयों के बिल अभी तक भुगतान नहीं किए गए हैं। इस मुद्दे को विधान परिषद में भी उठाया गया है। इस संबंध में, सार्वजनिक निर्माण विभाग ने विभिन्न विभागों से जानकारी मांगी है। ‘लोकवाहिनी’ ने पहले भी बकाया बिलों के कारण आने वाली आर्थिक समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया था। अब, सरकार की कार्रवाई के कारण इस मुद्दे पर फिर से ध्यान आकर्षित हो रहा है। विधान परिषद सदस्य सतेज उर्फ बंटी पाटिल, अशोक उर्फ भाई जगताप, सुधाकर अडबाले, धीरज लिंगाडे, जयंत आसगावकर और अभिजीत बंजारी ने इस मुद्दे को विधान परिषद में उठाया है। इस मुद्दे के माध्यम से यह सवाल उठाया गया है कि राज्य के लगभग 20 जिलों में काम कर रहे ठेकेदारों के 96 हजार करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जिससे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।
शासन के निर्णयों की ओर लक्ष विदर्भ में सार्वजनिक निर्माण, आदिवासी विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पानी आपूर्ति योजनाओं जैसे विभिन्न कार्यों में ठेकेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, यदि काम पूरा होने के बाद भी भुगतान में देरी होती है, तो ठेकेदारों के वित्तीय लेनदेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मजदूरों के भुगतान, निर्माण सामग्री के लिए भुगतान, मशीनरी की लागत और भविष्य की परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। परिणामस्वरूप, चल रही परियोजनाओं की गति धीमी हो जाती है, और नई परियोजनाओं को शुरू करने की गति प्रभावित हो जाती है। अमरावती सह विदर्भ क्षेत्र के ठेकेदारों के बकाया भुगतानों का मुद्दा पहले भी चर्चा में आ चुका है। भुगतानों में देरी के कारण ठेकेदारों को किन आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इस मुद्दे को ‘लोकवाहिनी’ ने विस्तार से प्रकाशित किया था। इसलिए अब विदर्भ क्षेत्र के ठेकेदारों की नजर सरकार की कार्रवाई पर है। विधान परिषद में प्रस्तुत किए गए प्रश्नों में बताया गया है कि बकाया भुगतानों के कारण लगभग 24 हजार किलोमीटर सड़कें, 1,600 पुल एवं 18 हजार गांवों में पानी की आपूर्ति संबंधी योजनाओं पर प्रभाव पड़ा है।












